देहरादून- उत्तराखण्ड की अनोखी लोक परम्परा के प्रतीक फूलदेई त्यौंहार के अवसर पर पूर्व सीएम हरीश रावत को अपना बचपन का दिन याद आया और उन्होंने अपने बचपन का अनुभव सोशल मीडिया के जरिए शेयर किया.

हम बच्चे प्रत्येक दरवाज़े पर जाते थे और कहते थे ‘फूल देई-फूल देई, शम्मा देयी

उन्होंने कहा कि हम गाँव के बच्चे प्रत्येक दरवाज़े पर जाते थे, और फूल देहलीज़ पर डाल कर के कहते थे ‘फूल देई-फूल देई, शम्मा देयी, तमर बखार भरी रौ’, तुम्हारा भण्डार भरे और हमारी टोकरी भर दो, और लोग चावल और पैसा हमारी टोकरी में डाल देते थे. और हम सब बच्चे बहुत खुश होकर के अपनी-अपनी टोकरी लेकर के माँ के पास आते थे, और वो एक बर्तन में हमारे चावलों को इकट्ठा करती थीं, और शाम को उन चावलों में गुड़ डाल कर उसका मीठा चावल हम सब को खिलाती थीं. कितना आनंदमय वातावरण होता था गाँव का,प्रकृति के साथ पूरा गाँव, सब बच्चे थिरकते थे.



http://ift.tt/2p9Bu2N


See More

 
Top