• भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेन्स की नीति का प्रदेशभर में असर
  • व्यवस्था को घुन की तरह चाट रहे भ्रष्ट अधिकारियों पर भी कसी नकेल 
  • सधे हुए कदम और विकासोउन्मुख दिशा की ओर गंतव्य और लक्ष्य  नज़र आता देख राज्यवासी निश्चिन्त

राजेन्द्र जोशी 

देहरादून : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक मुलाकात में सूबे के वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की निर्णय क्षमता की तारीफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री में वह क्षमता मुझे नज़र आती है।  राजनीति के दंगल में अपना जीवन खपा चुके पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जिन्हे उत्तराखंड वासी ”हरदा” के नाम से भी पुकारते हैं, ने  मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत की निर्णय क्षमता और राज्य हित में उनके द्वारा लिए जा रहे निर्णयों पर उन्होंने त्रिवेन्द्र रावत को जहाँ बधाई दी वहीँ उन्होंने उनकी पीठ भी थपथपाई है। 

हालाँकि राजनीतिक लोग उनके इस बयान का राजनितिक निहितार्थ निकालते रहे लेकिन यह पहला मौक़ा है जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री की तारीफ की है। पूर्व मुख्यमंत्री ने ऐसे ही उनकी तारीफ नहीं की वैसे भी यदि देखा जाय तो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेन्स की नीति का प्रदेशभर में असर दिखाई दे रहा है।  सूबे में अब वो दलाल टाइप लोग नज़र नहीं आ रहे हैं जो पिछली सरकारों में उनकी नाक का बाल हुआ करते थे।  इतना ही नहीं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र  सिंह रावत ने सूबे की व्यवस्था को घुन की तरह चाट रहे भ्रष्ट अधिकारियों पर भी नकेल कसी है और ऐसे कई अधिकारियों ने प्रदेश छोड़ने में ही अपनी भलाई समझी, और जो अधिकारी बाहर नहीं जा पाए हैं उनको महत्वपूर्ण पदों से हटाया गया है। 

मुख्यमंत्री के पद पर ताजपोशी के बाद कुछ लोग मुख्यमंत्री पर आरोप लगाने लगे थे कि उनकी रफ़्तार सुस्त है लेकिन अब जिस रौ में मुख्यमंत्री चलते नज़र आ रहे हैं उनकी चाल में भले ही प्रदेशवासियों को तेज़ी नहीं दिखाई दे रही होगी लेकिन उनके सधे हुए कदम और विकासोउन्मुख दिशा की ओर गंतव्य और लक्ष्य  नज़र आता देख आज हर राज्यवासी निश्चिन्त है कि प्रदेश सीमित आर्थिक संसाधनों के होते हुए भी विकास के मार्ग पर दौड़ने को तैयार है।

इसे मुख्यमंत्री पर जनता के भरोसे के रूप में ही देखा जाएगा कि पहाड़ की सुध लेने वाले मुख्यमंत्री की नज़र पहाड़ के उन सुदूरवर्ती इलाकों पर उनकी नज़र है जहाँ आज़ादी के 70 साल बाद और राज्य के अस्तित्व में आने के 17 वर्षों बाद भी वे इलाके विकास से अछूते थे।  मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत की पहल पर चमोली जिले के सबसे दूरस्थ गांव घेस और हिमनी जैसे इलाकों को  डिजिटल गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

चमोली जिले में एक कहावत प्रचलित है ”घेस के बाद है दूसरा देश ” लेकिन मुख्यमंत्री की पहल पर इन दोनों गांवों में स्वान के माध्यम से वाई-फाई शुरू कर  दिया गया है जिसका ट्रॉयल बीते दिन मुख्यमंत्री ने वहां के स्कूली बच्चों से सफल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर  किया।  मुख्यमंत्री से सीधे बात करने के  बाद से वहां के बच्चों में जो उत्साह और जोश दिखाई दिया वह कबीले तारीफ है।

वहीँ मुख्यमंत्री के  मन में शुरू से ही सीमांत क्षेत्रों और वहां से हो रहे पलायन को लेकर पीड़ा थी वहीँ मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के प्रयासों से इसी कड़ी में उन्होंने 2014-15 से यहां नगदी फसलों के रूप में बनारस के पप्पू के माध्यम से मटर की खेती का जो प्रयोग शुरू करवाया था उससे इस क्षेत्र के लोगों की आर्थिकी को सबल प्रदान करने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने बीते  10 अक्टूबर को मटर की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए घेस क्षेत्र का जो दौरा किया वह इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुआ है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत का हल्का सा प्रयास इतनी बड़ी उपलब्धि के रूप में परिणित हो जाएगा ऐसी उम्मीद शायद किसी को नहीं रही होगी। इससे समूचे प्रदेश में यह भी संदेश गया है कि वह सीमांत क्षेत्रों और किसानों के प्रति सरकार कितनी संवेदनशील हैं और कितनी गहराई से सूबे के मुख्यमंत्री वहाँ के किसानों और पशुपालकों के बारे में सोच रहे हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत हालाँकि इन सबका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह को देते हैं।  उनका कहना है कि वे तो पार्टी के सिपाही और कार्यकर्ता हैं पार्टी के नेताओं के निर्देश का पालन करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं  है, उन्होने कहा केदारनाथ का कायाकल्प प्रधानमन्त्री मोदी जी की इच्छानुरूप किया जा रहा है आगामी ग्रीष्मकाल के दौरान मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को बाबा केदार के दर्शन और भी भव्य रूप से हो सकेंगे यही प्रधानमंत्री की परिकल्पना भी है। वहां घाटों का निर्माण कार्य कड़ाके की ठण्ड के बाद भी किया जा रहा है यह सब विकास कार्य आगामी यात्राकाल से  दिखाई देने लगेगा। उन्होंने वहां इतनी ठण्ड में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों सहित मजदूरों का धन्यवाद किया जो हाडकंपा देने वाली ठण्ड में भी कार्यरत हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा की गयी उनकी प्रशंसा पर उन्होंने कहा वे हमसे बड़े हैं और अनुभव में भी हमसे ज्यादा हैं उनका इतना कहना ही हमारा हौसला बढ़ाने के लिए काफी है।

देखिये उन्होंने  क्या कहा इस वीडियो में :-

 

  



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