उत्तराखंड में जबरन धर्म परिवर्तन कराने को अपराध घोषित कर दिया गया है। साथ ही जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले शख्स को 1-7 साल तक की सजा होगी और जुर्माना भी भरना पड़ेगा। 

वहीं धर्म परिवर्तन की कराने की नीयत से किए जाने वाले विवाह भी अमान्य घोषित होंगे। सोमवार को विधानसभा में सीएम त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में यह अहम फैसला लिया गया। 

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सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में सरकार ने धर्म स्वतंत्रता विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद अब धर्म परिवर्तन करने व कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। 

जबरन, साजिश और झूठ बोलकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को गैर जमानती अपराध घोषित कर दिया गया है। इसके तहत शिकायत करने पर तत्काल मुकदमा होगा। इस कानून के तहत, सामान्य वर्ग में धर्म परिवर्तन के मुकदमे पर 1-5 साल की जेल, एससी एसटी के धर्म परिवर्तन पर 2-7 साल की जेल होगी।  

1 महीने पहले करना होगा आवेदन 

अब धर्मांतरण के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में एक महीने पहले आवेदन करना होगा। इसके लिए बकायदा संबंधित जिले के डीएम के समक्ष आवेदन और शपथ पत्र देना होगा।  

बिना मंजूरी धर्म परिवर्तन पर सजा 

इस कानून के तहत बिना आवेदन के किए जाने वाले धर्म परिवर्तन अमान्य घोषित होंगे। वहीं इस नियम का उल्लंघन करने पर 3 महीने से 1 साल तक की सजा होगी। वहीं अगर एससी, एसटी से बिना इजाजत सामूहिक धर्म परिवर्तन कराया तो 6 महीने से 2 साल की जेल होगी और यह गैर जमानती अपराध होगा। 

परिवार पर भी होगी कार्रवाई 

धर्मांतरण में साथ देने वाले परिवार के सदस्यों व दोस्तों को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है। जिसके तहत आरोप सिद्ध होने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।



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