देहरादून- राजाजी टाइगर रिजर्व में दैनिक श्रमिकों को वन रक्षकों के पदों पर पूर्व में निरस्त की गई भर्ती प्रक्रिया में धांधली की परतें अब एक के बाद एक खुलकर सामने आ रही है। पूर्व में अदालत की शरण में गए 21 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र भी जांच में फर्जी पाए गए। ये बात भी निकलकर सामने आई कि कई प्रकरणों में नियमों को भी ताक पर रख दिया गया। और तो और एक रेंजर ने अपने बेटे को भी दैनिक श्रमिक दर्शा दिया था। रिजर्व के निदेशक सनातन की ओर से यह जांच रिपोर्ट प्रमुख मुख्य वन संरक्षक को भेजी जा रही है।

2015 में वन रक्षकों के पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया

वर्ष 2015 में राजाजी टाइगर रिजर्व में मस्टररोल पर कार्य करने वाले दैनिक श्रमिकों को वन रक्षकों के पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया गया। तब इसके लिए 33 पद विज्ञापित किए गए। भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई और फिर कर्मी चयनित भी हो गए।

कार्मिकों के प्रमाणपत्रों को लेकर शिकायतें हुईं

इसी बीच इन कार्मिकों के प्रमाणपत्रों को लेकर शिकायतें हुईं। प्रथम दृष्ट्या शिकायतें सही पाए जाने के बाद यह भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। इस बीच 21 अभ्यर्थी अदालत चले गए। अदालत के आदेश के बाद इनके प्रमाणपत्रों के साथ ही चयन में अपनाए गए मानकों को लेकर रिजर्व निदेशक की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने जांच की।

सूत्रों के अनुसार कमेटी ने इन अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्रों के साथ ही चयन में अपनाए गए मानकों को लेकर बारीकी से पड़ताल की। जांच में प्रमाणपत्र तो फर्जी पाए ही गए, कई चौंकाने वाली बातें भी सामने आईं। चहेतों को भर्ती करने के लिए न सिर्फ सरकारी अभिलेखों में हेर-फेर किया गया, बल्कि नियमों को भी दरकिनार कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि जांच रिपोर्ट में इन 21 अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त करने की सिफारिश की गई है।

जांच में सामने आई बातें

21 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र पाए गए फर्जी

श्रमिक दिखाने के लिए अभिलेखों में की गई छेड़छाड़

काम किसी ने किया और भुगतान किसी और को किया गया

रिजर्व में काम न करने वालों को भी जारी किए गए अनुभव प्रमाणपत्र

एक रेंजर ने अपने बेटे को भी दिखाया दैनिक श्रमिक



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