देहरादून: सत्ताधारी भाजपा सरकार चुनावी दौर से लेकर अभी तक जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता की बात करती है. जनता को हमेशा से नियमों का पालन करने और पाठ पढ़ाने वाली सरकार खुद नियमों का कैसे पालन कर रही है वो इस बात से साबित हो रहा है. भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाने का दावा करने वाली भाजपा सरकार खुद क्या कर रही है उन्हें मालूम ही नहीं है.

71 विधायकों में से 54 ने अभी तक नहीं दिया अपनी संपत्ति का ब्योरा

जी हां सूचना के अधिकार में मुहैया कराई गई जानकारी में चौंराने वाली बात सामने आई है और तो और इसमें सीएम भी शामिल हैं. आफको बता दें राज्य के 71 विधायकों में से 54 ने अभी तक अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है। इनमें मुख्यमंत्री, छह मंत्री और नेता प्रतिपक्ष भी शामिल हैं। अब तक तीन मंत्रियों समेत 17 विधायकों ने ब्योरा दिया है। हालांकि, इनमें भी केवल सात ने ही तीन माह की समयावधि के भीतर जानकारी उपलब्ध कराई।

3 माह के भीतर विधानसभा सचिव को अपनी संपत्ति का विवरण देना होता है

उत्तर प्रदेश मंत्री तथा विधायक अधिनियम-1975 की धारा तीन के तहत मंत्री, विधायकों का नियुक्ति या निर्वाचित होने के तीन माह के भीतर विधानसभा सचिव को अपनी संपत्ति का विवरण देना होता है। हालांकि यह स्वैच्छिक है अनिवार्य नहीं। इसके बाद हर साल 30 जून तक पिछले वर्ष की संपत्ति प्राप्ति, खर्च व दायित्वों का विवरण देना होता है। आमजन की सूचना के लिए इसे गजट में प्रकाशित किया जाता है।

उत्तराखंड बनने के बाद से बड़ी संख्या में विधायक और मंत्री इस परंपरा को नहीं मान रहे न इसका पालन कर रहे हैं.  मौजूदा विधायक भी संपत्ति ब्योरा देने में गंभीर नहीं दिख रहे। आरटीआई कार्यकर्ता नदीमुद्दीन को सूचनाधिकार के तहत बीती 28 मार्च को विस के लोक सूचना अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी पर गौर करें तो विधायकों को जून 2017 तक विवरण देना था।

अभी तक केवल तीन कैबिनेट मंत्रियों सहित 17 विधायकों ने ही संपत्ति का विवरण दिया है। इनमें से सात विधायकों ने निर्धारित समयावधि के भीतर ब्योरा दिया तो चार के विवरण में तारीख दर्ज नहीं है। छह विधायकों ने पिछले वर्ष जुलाई से इस वर्ष फरवरी तक ब्योरा उपलब्ध कराया। वहीं, मुख्यमंत्री समेत सात मंत्रियों के साथ ही नेता प्रतिपक्ष और अन्य विधायकों ने संपत्ति का ब्योरा अभी तक नहीं दिया है।

इन मंत्री, विधायकों ने दिया ब्योरा

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ.हरक सिंह रावत व यशपाल आर्य, विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, विधायक संजीव आर्य, धन सिंह नेगी, केदार सिंह रावत, गणेश जोशी, बलवंत सिंह भौंर्याल, विनोद चमोली, हरभजन सिंह चीमा, खजानदास, कैलाश चंद्र गहतौड़ी, पूरन सिंह फत्र्याल, सुरेंद्र सिंह जीना व प्रीतम सिंह पंवार।

इन्होंने नहीं दिया ब्योरा

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, काबीना मंत्री प्रकाश पंत, मदन कौशिक, अरविंद पांडेय व सुबोध उनियाल, राज्यमंत्री रेखा आर्य व डॉ.धन सिंह रावत, नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृद्येश के अलावा 47 विधायक



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