• चहेती हैली कंपनी को लाभ देने के लिए निविदा शर्तों में फेरबदल !
  • अब तक कई बार निविदा शर्तों में किया जा चुका है उलट-फेरबदल !
  • सरकार का एक चर्चित अधिकारी कर रहा है यूकाडा की दलाली !
  • यूकाडा को बेरोजगारों का  ध्यान नहीं बल्कि अपनी जेब कैसे भरे उसकी ज्यादा चिंता 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : उत्तराखंड का नागरिक उड्डयन विभाग (यूकाडा) अपने  में आने से लेकर आजतक विवादों में रहा है। केदारनाथ में हेली सेवा इसके लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित होती रही है यही कारण है बीते कई सालों से यूकाडा आज तक केदारनाथ में हेली सेवाओं की व्यवस्था को ठीक से न तो पटरी पर ही बैठा पाया है और न ही आज तक वह वहां हेली सेवाओं के ऑपरेशन के लिए नियम व शर्तें तक लागू नहीं कर  पाया है। 

हालत अब यहाँ  तक आ पहुंचे हैं कि अपनी चहेती हैली कंपनी को येन-केन प्रकारेण कैसे लाभ पहुँचाया जाय इसके लिए यूकाडा ने अब तक टेंडर प्रक्रिया के लिए जारी होने वाली निविदा शर्तों में कई बार उलट-फेर कर दिया है।  यूकाडा ने बीते वर्ष भी इसी तरह से अपनी चाहती हेली कंपनी को एडजस्ट करने के लिए तमाम जोड़ -तोड़ किया था लेकिन बाद में मामले के न्यायालय तक पहुँचने के बाद यूकाडा को मुंह की खानी पड़ी थी। उसके बाद फिर वहीँ पुरानी व्यवस्था यूकाडा को मज़बूरी में लागू करनी पड़ी। 

गौरतलब हो कि अभी चारधाम यात्रा शुरू होने में लगभग दो सप्ताह ही बाकि हैं, लेकिन यूकाडा में हेली सेवाओं को लेकर कभी देहरादून तो कभी दिल्ली में हेली कंपनियों की बैठक बुलाई जा रही है। जानकारों का कहना है कि यह बैठक देहरादून अथवा दिल्ली में इसलिए बुलाई जा रही है जिससे  यूकाडा के चर्चित अधिकारी अपनी चहेती कंपनी को किसी भी तरह से अन्य कंपनियों से मान -मुनव्वल करके केदारनाथ में चलने वाली हेली सेवाओं के लिए तैयार कर सके। 

एक जानकारी के अनुसार यूकाडा की तरफ से उत्तराखंड सरकार का एक चर्चित अधिकारी बीच-बचाव या यूँ कहें दलाली का काम कर रहा है।  चर्चा तो यहाँ तक यूकाडा  का एक इंजीनियर और इस अधिकारी में अपनी चाहती कंपनी को हेली सेवाओं का काम थोक में देने पर रजामंदी हो चुकी है।  और उस चाहती कंपनी को ही अन्य कंपनियों को अपने पक्ष में करने का जिम्मा भी दिया गया है यही कारण यही कि वह चाहती हेली कंपनी सबको काम देने पर राजी हो गयी है. लेकिन चर्चा यहाँ यह भी है कि यह कंपनी केदारनाथ  श्रद्धालुओं  के एवज में मोती रकम ऐंठेगी जो कद्दू कटेगा सबमें बंटेगा की नीति  पर यात्रियों  जेबें काटकर आपस में बांटा जाएगा।  जबकि केदारनाथ यात्रा के लिए कुछ स्थानीय और कुछ अन्य हेली कंपनियां यात्रियों की जेबें न काटते हुए काम से कम मुनाफा लेते हुए हेली सेवाएं चलने के लिए तैयार हैं लेकिन उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।  

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दो दिन पहले केदारनाथ घाटी में वर्षों से काम कर रहे  हेली ऑपरेटरों ने युकाडा को संयुक्त रूप से एक ई-मेल किया। जिसमे उन्होंने टेंडर से पहले 5 अप्रैल को यूकाडा से बैठक की मांग की है। इसके साथ ही ऑपरेटरों ने मांग की है कि टेंडर की शर्तों में प्रत्येक संघ में 3 ऑपरेटरों की अनिवार्यता की जगह 4 ऑपरेटरों को शामिल किया जाये, जिससे अधिक से अधिक से ऑपरेटरों को मौका मिले। इसके आलावा एक अन्य शर्त जिसमे केदारधाम में 3 साल का अनुभव अनिवार्य किया गया है, उसे भी 2 साल करने की मांग की गई है।

इसके आलावा ऑपरेटरों की आपत्ति है कि, टेंडर में एक शर्त ये रखी गई है कि, उत्तराखंड में ऑपरेटर का पिछले 2 साल से कोई भी हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त ना हुआ हो। इस पर उन्होंने इस दायरे को उत्तराखंड से बढाकर पूरे देश भर को करने की मांग की है, क्योंकि माना जा रहा कि किसी ऑपरेटर विशेष के हेलीकाप्टर उत्तराखंड से बाहर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं और उस कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए ही ये दायरा सिमित किया गया है, ताकि वो उसकी जद में ना आ पाए।

केदारघाटी में हेली सेवाओं को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि क्यों नहीं यूकाडा हेली कंपनियों में प्रतिस्पर्धा करवाती है जिसका फायदा जहाँ केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को होगा वहीँ स्थानीय लोग भी हेलीकाप्टर सेवा का लाभ उठा पाएंगे।  उनका कहना है केदारघाटी में यूकाडा यात्रियों की सुरक्षा और हेली सेवा चलने वाली कंपनियों की लूट पर रोक लगाने के बजाय ठेका किसको दिया जाय इसपर ज्यादा चिंतित नज़र आ रही है।  स्थानीय लोगों का कहना है केदार घाटी में बने हुए तमाम हेलीपैडों से वहां के लोगों का रोज़गार भी जुड़ा हुआ है जो छह महीने का इंतज़ार करते हैं। लेकिन यूकाडा को उनके रोजगार का कोई ध्यान नहीं बल्कि अपनी जेब कैसे भरे उसकी चिंता ज्यादा है।   



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