मां को उसके ही बसाए घर से निकालने वाले बेटे को बेदखल किया जाएगा। कानपुर के चकेरी निवासी उर्मिला पांडे (60) ने हाईकोर्ट में बेटे की करतूत के खिलाफ अर्जी दी थी। कोर्ट ने एसडीएम सदर कोर्ट को मामले की सुनवाई का आदेश दिया था। 22 मार्च को एसडीएम कोर्ट ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है। इस फैसले से बिठूर के रामधाम आश्रम में रह रही उर्मिला का दोबारा गृह प्रवेश हो सकेगा।

बेटे-बहू ने की मारपीट, घर से निकाला

उर्मिला पांडेय ने याचिका में कहा था कि उनके पति राजेंद्र पांडेय एयरफोर्स में नौकरी करते थे। जिनका निधन 30 जून 1986 को हो गया था। पति के निधन के बाद उन्होंने जैसे-तैसे मकान बनवाया। बेटी रश्मि और बेटे मनीष को पाला-पोसा और दोनों का विवाह कराया। बेटी ससुराल में है। उर्मिला ने मनीष की शादी सन 2000 में अनीता से कराई थी। उर्मिला के अनुसार बेटा और बहू उसके साथ अक्सर मारपीट करते थे। 2008 में मारपीट की गई जिसकी रिपोर्ट भी चकेरी थाने में दर्ज है। दोनों ने घर से उन्हें निकाल दिया था। तबसे वह वृद्ध आश्रम में रह रही हैं।

वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 में 60 साल या इससे ऊपर की उम्र के लोगों को सीनियर सिटीजन माना गया है। बेटा, बेटी, पौत्र और पौत्री पर इनकी देखभाल करने का प्रावधान है। अगर किसी के बच्चे नहीं हैं तो प्रापर्टी पर क्लेम करने वाले रिश्तेदारों को देखभाल करनी होगी। अगर कोई अपने मां-पिता, बाबा या दादी की देखभाल नहीं करता है तो एसडीएम दस हजार रुपये तक प्रतिमाह भत्ता दिला सकते हैं। न देने पर तीन माह की कैद, पांच हजार रुपये तक जुर्र्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। अगर कोई मां-बाप अपने बच्चों के नाम प्रापर्टी की वसीयत कर देता है और उसके बाद बच्चे उनकी देखभाल नहीं करते हैं तो वसीयत शून्य घोषित हो सकती है। मां-बाप इसके लिए एसडीएम के यहां अर्जी देंगे। कोर्ट भी जा सकते हैं।

मां-बाप की देखभाल न करने औऱ उत्पीड़न करने पर एसडीएम से की जाएगी शिकायत  

मां-बाप की देखभाल न करने, उनका उत्पीड़न करने की शिकायत एसडीएम से की जाएगी। यह जरूरी नहीं है कि संबंधित व्यक्ति ही शिकायत करें। अधिनियम में प्राविधान है कि किसी भी व्यक्ति से सीनियर सिटीजन के उत्पीड़न की शिकायत मिलती है तो वह खुद संज्ञान लेकर कार्यवाही करेंगे। अधिनियम की धारा 22 में एसडीएम को कई अधिकार दिए गए हैं। वह पुलिस को सीनियर सिटीजन की सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त करने को कह सकता है।

वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत शहर में पहला फैसला अगस्त 2016 में आया था। बाबा और दादी को परेशान करने में पौत्र की बीबी पर जिला प्रशासन ने एक्शन लिया था। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को इस एक्ट के तहत युवती के खिलाफ एक्शन लेने को कहा था। तब एसडीएम सदर ने नजीराबाद पुलिस को बहू को बलपूर्वक घर से बेदखल किया गया था। कौशलपुरी नजीराबाद निवासी 86 साल के चाननलाल अजमानी और 82 साल की उनकी पत्नी कृष्णा देवी ने पौत्र की बीबी के उत्पीड़न करने पर हाईकोर्ट की शरण ली थी।

बहू-बेटा कर रहा है परेशान तो इस नंबर पर फोन घुमाईए

किसी वरिष्ठ नागरिक को बेटा, बहू या अन्य परिजन परेशान कर रहा है तो वह टोल फ्री नंबर 18001800060 मिलाए। गाइड समाज कल्याण संस्था प्रशासन और पुलिस की मदद से उनकी मदद करेगी। यह संस्था लखनऊ, कानपुर और बरेली में वृद्धजनों की मदद कर रही है। संस्था की फाउंडर डॉ. इंदू सुभाष ने बताया कि यह टोल फ्री नंबर 15 जून 2017 से काम कर रहा है। अब तक इस नंबर पर 3900 वृद्धों ने शिकायत दर्ज कराई है।



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