देहरादून- प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली भाजपा सरकार ने तो कोई ऐसा काम या कार्रवाही नहीं की जिससे की उनकी वाह-वाही हो लेकिन जीरो टॉलरेंस की राह पर अगर कोई चलता दिखे तो वह हैं आईएएस डी. सेंथिल पांडियन. सेंथियन पांडियन की कार्रवाही से सचिवालय से लेकर सीएम कार्यालय तक हड़कंप मच गया है. दरअसल आईएएस सेंथियल पांडियन को व्हाट्सएप्प पर सूचना मिली जिसके बाद उन्होंने कार्रवाई की.

एनएच 74 जैसे बड़े घोटाले को खोलकर सबके सामने रखा

जी हां ये वही आईएएस है जिन्होंने एनएच 74 जैसे बड़े घोटाले को खोलकर सबके सामने रखा था लेकिन इसके बाद डी. सेंथिल पांडियन को एनएच-७४ घोटाले की जांच के बाद कुमाऊं कमिश्नर के पद से हटा दिया गया था। जिसके बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर जमकर सवाल उठे और जमकर किरकिरी भी हुई थी।

आपको बता दें डी. सेंथियल पांडियन के पास वर्तमान में सचिव उद्यान के साथ-साथ परिवहन, कृषि शिक्षा, कृषि एवं कृषि विपणन व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सचिव भी हैं।

वाहन पर पदनाम लिखना प्रतिबंधित

गौरतलब हो कि कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में वाहन पर अपना पदनाम लिखना प्रतिबंधित किया था क्योंकि कई लोग इसका दुरप्रयोग कर घटना को अंजाम देकर रौब जमाते थे. कई लोग नियम-कानून तोड़ अपना रौब दिखाते थे. जैसे वाहन पर पदनाम लिख कर इंहे लाइसेंस मिल गया हो नियम-कानून को तोड़ने का.

बीते दिनों पहले ही उत्तराखंड में शराब की तस्करी की गाड़ी पकड़ी गई, जिस पर भाजपा का झंडा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो लगी थी। जिससे ये साफ झलक रहा था कि किस प्रकार का दुरुपयोग हो रहा है।

ये-ये खामियां आई सामने

तमाम जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि गाड़ी पर दुर्घटना से बचने के लिए लगाए गए एयरबैग तब तक काम नहीं करते, जब तक व्यक्ति ने सीट बेल्ट न पहनी हो। यदि सीट बेल्ट भी पहनी है और गाड़ी के आगे बोनट पर सेफ गार्ड लगा है तो भी एयरबैग नहीं खुलते। ऐसे में हर वर्ष हजारों लोग दुर्घटना का शिकार होकर काल के गाल में समा जाते हैं।

उत्तराखंड में सचिवालय से लेकर जिला स्तर पर तमाम सरकारी वाहनों पर लगे पदनाम की पट्टिका के साथ-साथ सेफ गार्ड के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही प्रभावी रूप से नहीं हुई थी।

व्हाट्सएप्प पर भेजी गई चार फोटो, तुरंत कार्रवाही

आपको बता दें आईएएस डी. सेंथिल पांडियन को व्हाट्सएप्प पर चार फोटो भेजी गई जिस पर उन्होंने तुरंत कार्रवाही की और उन्हे नोटिश भेजा. उस कार्रवाही की चपेट में पहला वाहन उत्तराखंड शासन के सचिव अरुण ढौंडियाल का था जबकि दूसरा मुख्यमंत्री की प्रचार यूनिट, तीसरा एक न्यायाधीश का और चौथा मीडियाकर्मी का था।

डी. सेंथिल पांडियन ने तत्काल कार्यवाही का आदेश दिया और चारों वाहनों को नोटिस जारी किया कि तुरंत वाहन पर लगाए गए सेफगार्ड और पदनाम वाली पट्टिका को हटा दिया जाए। आपको जानकर हैरानी होगी की सचिवालय में ऐसी गाडिय़ां भी चल रही हैं जिन पर टैक्सी नंबर तो लिखा है, किंतु पीली पट्टी की बजाय सफेद पट्टी पर काले अक्षरों से लिखा गया है, जो कि नियम विरुद्ध है।



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