उत्तराखंड ना केवल अपनी प्राकृतिक ख़ूबसूरती व देव्यशक्तियो बल्कि प्राकृतिक संसाधनो से भी परिपूर्ण राज्य है। हिमालय की ऊँची घटियों व उत्तराखंड के जंगलो में ३००० से ५००० किलोमीटर की ऊँचाई पर एक ऐसा पुष्प पाया जाता है जो वर्ष में केवल एक बार खिलता है वो भी केवल चंद घंटो के लिए मात्र। भारत के अलग अलग राज्यों में इसे अलग अलग नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड में इस पुष्प को ‘ब्रम्हकमल’ कहा जाता है। कश्मीर में इस पुष्प को ‘गलगल’ तो हिमाचल में इसे ‘दूधाफूल‘ के नाम से जाना जाता है। ब्रम्हकमल उत्तराखंड का ‘राज्य पुष्प‘ है। यह तो आप सभी जानते होंगे आमतौर पर कमल पानी या दलदल में उगते है परंतु ‘ ब्रम्हकमल’ एक ऐसी प्रजाति का कमल है पानी के बीच या दलदल में नही बल्कि स्वच्छ स्थान पर उगता है। वर्तमान में शोधकर्ताओं द्वारा किए गए खोज में यह जानकारी प्राप्त हुई है की भारत में इस पुष्प की ७० से अधिक प्रजातियों मौजूद है, जिनमे से ५० प्रजातियाँ उत्तराखंड के ही अलग अलग ऊँची घटियों जैसे की चिफला, रूपकुंड, हिमकुंड, फूलो की घाटी तथा केदारनाथ खंड में पाई गई है।

#ब्रम्हकमल का आध्यात्मिक महत्व व इतिहास:

भगवान ब्रम्हा जी के प्रिय पुष्प के रूप में जाने जाने वाले ब्रम्हकमल वर्ष में केवल एक बार जून से सितम्बर के माह के मध्य खिलता है। मुख्यतौर पर हिमालय की ऊँची घटियों में पाया जाने वाले ब्रम्हकमल पुष्प का दीदार कर पाना अत्यंत दुर्लभ होता है, क्योंकि इसके खिलने का समय ‘सूर्यास्त‘ के बाद या फिर ‘मध्यरात्रि‘ का होता है, और इसकी अवधी भी केवल चंद घंटो की होती है। महाभारत में भी इस पुष्प का वर्णन किया गया है। कहाँ जाता है इस पुष्प की मनमोहक सुगंध ने ‘द्रौपदी’ को इतना व्याकुल कर दिया था की उन्होंने अपने पति दुर्योधन से इस पुष्प को अपने लिए ले आने की माँग कर दी थी। हिंदू शास्त्रकरो की ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों को भी इस पुष्प का दीदार करने का सौभाग्य प्राप्त होता है , उनपर सदैव भगवान ‘ ब्रम्हा ‘ जी की कृपा बनी रहती है।

#ब्रम्हकमल के औषधिक महत्व:

उत्तराखंड के जंगलों व हिमालय की घटियों में कई ऐसी जड़ीबूटियाँ व औषधियों का भंडार है जिसका उपयोग बड़ी से बड़ी बीमारियों के उपचार में किया जा रहा है व भविष्य में भी किया जा सकता है। ब्रम्हकमल पुष्प भी उन्ही औषधि में से एक है जिसका उपयोग कई रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। जिन रोगों के उपचार में इस पुष्प का उपयोग किया जाता है उनके नाम कुछ इस प्रकार है।

  1. कैंसर : इस रोग की औषधि के निर्माण में ब्रम्हकमल पुष्प की सुखी पंखुड़ियो का इस्तेमाल किया जाता है।
  2. खाँसी व बुखार : खाँसी व बुखार जैसी तकलीफ़ में इस पुष्प से निकलने वाले रस का इस्तेमाल करने से जल्द राहत महसूस होती है।
  3. हड्डियों की तकलीफ़: हड्डियों से जुड़े रोगों के लिए भी यह पुष्प काफ़ी फ़ायदे है।
  4. टी. बी : टी. बी जैसे रोग के इलाज में भी इस पुष्प की पंखुड़ी का औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
  5. लिवर इंफ़ेकसन: आज के समान में खानपान में बढ़ती मिलावट के चलते लिवर इंफ़ेक्सन जैसी समस्या आधिकतर सुनने को मिलती है। लिवर इंफ़ेक्सन से जूझ रहे रोगियों लिए यह एक रामबाण औषधि है।

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