नैनीताल- हाईकोर्ट ने एनसीईआरटी किताबों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पब्लिक स्कूलों को मामूली राहत दी है। शुक्रवार को दिए गए अंतरिम आदेश में कोर्ट ने प्रदेश सरकार के 23 अगस्त 2017 के जीओ को सही ठहराया है लेकिन इसके बाद के तीन शासनादेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। इसके तहत सरकारी विभाग स्कूलों और प्रकाशकों के यहां फिलहाल छापे नहीं मार सकेंगे। साथ ही कोर्ट ने निजी प्रकाशकों को पुस्तकें छापने की छूट देने के साथ शर्त रखी है कि इनके दाम एनसीईआरटी की किताबों से अधिक नहीं होने चाहिए।

याचिका दायर करने वालों में ये थे शामिल

संयुक्त विद्यालय प्रबंधन समिति ऊधमसिंह नगर, निशा एजुकेशन, नॉलेज वर्ल्ड, प्रिंसिपल्स प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन देहरादून, ऊधमसिंह नगर एसोसिएशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल, जसवंत एजुकेशनल ट्रस्ट, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन एंड चिल्ड्रन एसोसिएशन आदि ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।

2018-19 के लिए जारी किया था शासनादेश

राज्य सरकार ने 23 अगस्त 2017 को आईसीएससी बोर्ड को छोड़कर सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य कर निजी प्रकाशकों की किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया था। आदेश का पालन न करने पर दंड का प्राविधान करते हुए 15 फरवरी, 6 मार्च और 9 मार्च 2018 को तीन अन्य जीओ जारी किए थे। निजी स्कूलों और प्रकाशकों ने इन्हें हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट में सीबीएसई और एनसीईआरटी ने भी सरकार का समर्थन किया था।

सरकार का पक्ष

निजी प्रकाशकों की किताबें महंगी हैं। सरकार शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने के लिए यह कदम उठा रही है। जरूरी होने पर निजी प्रकाशक किताब छाप सकता है लेकिन किताब एनसीईआरटी की दरों पर उपलब्ध करानी होगी।

प्रकाशकों ने कहा

प्रकाशकों ने कहा कि उनकी किताबों में बेहतर कागज लगा होता है। उनमें अन्य पठन सामग्री भी दी जाती है। सरकार ने यह कदम निजी कारोबारियों को हतोत्साहित करने के लिए उठाया है। छापेमारी से सरकार गलत वातावरण बना रही है।

अदालत ने अंतरिम आदेश दिए

सभी पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने सरकार के अगस्त 2017 के आदेश को सही ठहराया लेकिन अन्य तीन आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है। वहीं निजी प्रकाशकों को पुस्तक छापने की छूट इस शर्त के साथ दी है कि दरों के एनसीईआरटी के तुलानात्मक रखें और इसकी जानकारी सरकार और सीबीएसई को भी दें। अगली सुनवाई तीन मई को होगी।



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