देहरादून- शहर के नगर निगम के 650 से ज्यादा सफाई कर्मचारियों सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर जहां हडताल पर है, वहीं सफाई कर्मचारियों की 8 दिनों से चल रही हड़ताल से राजधानी देहरादून कूड़े के ढेर में तब्दील होती जा रही है. जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों ने दूनवासियों की मुसिबतों को बढ़ा दिया है। इन दिनों देहरादून की तस्वीर ऐसी है जैसे लग रहा है कि शहर में कूड़ा नहीं बल्कि कूड़े में शहर है. जहां भी देखो कूड़े का अंबार लगा हुआ है. लेकिन इसे कैसे निजात आम लागों को मिलेगी इस पर सरकार को ध्यान बिलकुल भी नहीं है।

महीना वेतन 5000, प्रतिदिन 285 रुपये देने की मांग

आपको बता दें सफाई कर्मचारियों का महीने वेतन 5000 रुपये है जबकि सफाई कर्मचारियों की सरकार से मांग है कि उन्हे 285 रूपये प्रतिदिन की न्यूनतम मजूदरी दी जाए. उनका कहना है कि इस महंगाई में खर्चा चलाना और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है.

आपको बता दे कि अभी तक कर्मचारियों को 5000 रूपये प्रतिमाह को मानदेय दिया जाता है। जो प्रति दिन न्यूनत मजदूरी से 120 कम है। यदि सफाई कर्मचारियों की न्यूनत मजदूरी की मांग को सरकार पूरा कर देेती है तो कर्मचारियों को प्रतिमाह 5000 की जगह 8550 रूपये मानदेय मिलेगा।

मंत्री-विधायकों को हजारों-लाखों का मिलने वाला वेतन भी कम लगता है.

सोचने वाली बात है कि मंत्री-विधायकों को अपना हजारों-लाखों का मिलने वाला वेतन भी कम लगता है. औऱ सफाई कर्मचारी जो दुनिया का कूड़ा-कचरा उठाकर देश का, राज्य का शहर का भला कर रहे है, जनता को स्वच्छ वातावरण देने में मदद कर रहे हैं, सरकार की मदद कर रहे है दून को स्वच्छ रखने में, मदद कर रहे है पीेएम मोदी के स्वच्छ भारत को कायम रखने में..

विधायकों का बढाया हजारों रुपये वेतन और हड़तालियों का 120 रुपये बढ़ाने में कतरा रही 

ऐसे में सरकार को सफाई कर्मचारियो का वेतनमान 285 रुपये प्रतिदिन देना भारी लग रहा है. जैसे मानो 285 रुपये प्रतिदिन देकर सरकार कर्ज के बोझ तले दब जाएगी. अपना वेतन, गाड़ी, कोठी, सुरक्षा गार्ड ये तो मंत्री-विधायकों को कम लगा…तभी तो अपनी सरकार रहते, अपनी सत्ता रहते मंत्री-विधायकों का वेतन बढ़वा लिया…और सीएम साहब ने भी उसे सहीं माना. लेकिन मुख्यमंत्री को सफाई कर्मचारियों का वेतन 120 रुपये बढ़ाना खल रहा है. सीएम 120 रुपये प्रतिदिन बढ़ाने में कतरा रहे हैं.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से सवाल, जो कर रहे आपकी मदद उन्ही को..

सीएम त्रिवेंद्र रावत से में सवाल है जो सफाई कर्मचारी आपके शहर को, आपकी देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद को बरकरार रखने में, पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियन को स्वच्छ बनाने में मदद कर रहे हैं क्या आप उन्हें 120 रुपये प्रतिदिन वेतन नहीं दे सकते. मंत्री-विधायकों ने जब अपनी मासिक वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा उसमें आपको कोई आपत्ति नहीं हुई…क्यों? क्या जान सकते हैं हम…क्योंकि राज्य में आपकी सरकार है सिर्फ इसलिए.

देहरादून में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से राज्य सरकार खुद पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगा रहे हैं. एक सवाल और क्या पीएम मोदी इस बात से वाकिफ है कि उत्तराखंड राज्य की इन दिनों क्या हालत है औऱ कैसे उनके अभियान को पलीता लगाने में सरकार कैसा काम कर रही है. और देहरादून की क्या तस्वीर है अगर उन्हे नहीं मालूम तो जरुर  उन्हे यहां की तस्वीर भेजकर दिखाई जाई.



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