न जाने कितनी पुरानी कहावत है..लेकिन आज भी फिट बैठती है..आपने भी जरूर सुनी होगी..वही..जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली..शराब महकमा इसका मॉडल बना हुआ है..अब देखिये न..एक जैसे मामले में कोई तो सस्पेंड हो के बैठे हैं..कोई मौज काट रहे..कोई सस्पेंड हो गए..अपनी करतूत से..सिर्फ अदालती फरमान के बूते कुर्सी पर हैं..उनको चार्जशीट जाने क्यों नहीं दी जा रही..ये तो कोई बात नहीं हुई न..महज तीन दुकान न बिकने पर एक छुटका तो सस्पेंड हो जाता है..दूसरे छुटके का धनिया भी नहीं उखाड़ पा रहे..तब भी..जब उससे 19 दुकानें नहीं बिकीं..कहाँ तीन..कहाँ 19..है कोई जवाब सरकार मेरी..

और आगे की कहानी सुनिए..दिलचस्प है..हाँ बता देता हूँ..इसका ताल्लुक चम्पावत और उधमसिंह नगर से है..चम्पावत का डीईओ राजेन्द्र कुमार सस्पेंड हो गया था..आरोप! तीन दुकानें नहीं उठवा पाया..बिचारा..शराब महकमे के डॉन समझे जाने वाले एक जॉइंट कमिश्नर की आँख का काँटा था..साथ ही उन छुटकों का भी..जो उसके चेले हैं..इसका खामियाजा उसको भुगतना पड़ा..एक बात बताइए..आखिर कैसे चम्पावत वाले को देहरादून-हरिद्वार वाले से जोड़ कर देख सकते हैं..मुअत्तली के मामले में..देहरादून-हरिद्वार वालों ने क्या तो गदर नहीं काटा हुआ है..अभी भी काट रहे..मंझले आका की सरपरस्ती में..

दोनों दुबले हुए जा रहे थे..फिर से डीईओ की कुर्सी पर बैठने के लिए..सुना कि बहुत माल फंसा हुआ है..उनका खुद का..शराब के धंधे में..अगर कुर्सी पर फिर न बैठते न..तो माल न मिलने की इन्तहां तक फंसता..सो हाई कोर्ट पहुंचे..स्टे ले आए..फिर बैठ गए..पुरानी कुर्सी पर..चम्पावती नहीं बैठा..बोल रहा..नहीं जी..मेरे लिए तो हेड क्वार्टर में अटैचमेंट ही मुनासिब..मौसम अभी ठीक नहीं..वह हाई कोर्ट भी नहीं गया..अब दोनों इधर के छुटके दबाव डाल रहे..चम्पावत वाले पर..तुम भी जाओ..ज्वाइन करो..खैर इससे अलग कहानी और..बहुत हैरत अंगेज…यहाँ लगता है..जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली लाइन परफेक्ट..

ये तो किसी को पता ही नहीं चला..मीडिया की बात नहीं कर रहा..उसको तो पता ही नहीं रहता इन दिनों..जानकारी में आ जाए तो खेल कर जाता है..या फिर कलेजा काँप उठता है..लिखने से पहले..दिखाने से पहले..मैं बात कर रहा..सरकार के आला अफसरों की..सरकार की..उधमसिंह नगर में 19 दुकानों को किसी ने नहीं लिया..वहां के छुटके आलोक बुरी तरह  नाकाम रहे..दुकानों को उठवाने के मामले में..सोचिये कितना तो नुक्सान सरकार को हो गया..राजस्व का..

अब यही होता तो बात होती..आप हैरान होंगे..परदेसी शराब की 18 दुकानों को मुफ्त में ही सौंप दिया भाई ने..दुकानदारों को..आठ दुकानें तो देसी शराब की भी सौंप डाली..अब ऐसा कहाँ होता है भाई..बिना एक्साइज ड्यूटी के दुकानें..! ऐसे मिले तो अपन राम भी कूद जाए..इस चोखे धंधे में..दिक्कत तो एक्साइज ड्यूटी देने की ही तो होती है..इतने में भाई ने बस नहीं किया..दुकानें अपने ख़ास बन्दों को दीं..कौड़ियों के भाव..आलू की कीमत पर कह सकते हैं..बगैर एक्साइज ड्यूटी के ये सब कैसे भाई..?

अब सवाल उठता है..इतनी गड़बड़ी करने वाले..दुकानों को लुटा डालने वाले..डीईओ पर काहे को मेहरबानी! क्यों नहीं उसको सस्पेंड किया जाना चाहिए..?कोई जवाब दे सकता है..?अगर उसने कोई गुनाह नहीं किया..तो फिर राजेन्द्र कैसे मुअत्तल?कहानी ऐसे थोड़ी खत्म..आप जानते नहीं होंगे..एक इंस्पेक्टर हैं..विष्णु थापा..महिला हैं..काशीपुर में तैनात थीं न..तो छापे में पुलिस वालों के साथ थीं..शायद 25-30 पेटियां शराब की पकड़ी गईं थीं..विष्णु को मुअत्तल होना पड़ा था..तुम्हारे इलाके में अवैध शराब कैसे..

अरे भाई..विष्णु पर तो तुमने क़ानून झाड़ा..ठीक है..बनता होगा मामला..देहरादून के इंस्पेक्टर हैं एक..शुजात हसन..उस पर क्यों नहीं बनता भाई..तनिक समझा देते..अपन कम अक्ल..मंद बुद्धि को..कुछ दिन पहले ही तो छापा पड़ा था न..उसके इलाके में..पटेल नगर में..1025 पेटियां अवैध शराब की पकड़ी नहीं गई थीं..क्या हुआ..शुजत वहीँ का वहीँ..विष्णु तो 25-30 पेटी में ही नाप दी गई थीं..शुजत क्या किसी का करीबी रिश्तेदार!..कौन देगा जवाब..?ये नहीं चलेगा..हुजुर..ऐसे तो सरकार बदनाम हो जाएगी..पिक एंड चूज चलता रहेगा तो..

और सरकार का यह अंदाज तो गजब का है..तुम्हारी अदाओं पे मैं वारी-वारी जाऊं..वाला..जिन तीन डीईओ को सस्पेंड किया था..उनको अभी तक चार्जशीट नहीं दी गई हैं..एसीएस (शराब) डॉ.रणवीर सिंह से पूछा था मैंने..क्या कर रहे हैं साहब..चार्जशीट देने पर..बोल रहे..सफाई मांगेंगे..पहले..छुटकों से..सन्तोषजनक सफाई न रही तो देखेंगे..आगे..चार्जशीट करने पर..उससे पहले लॉ वालों की राय भी लेंगे..अरे भाई आप बचाने के लिए जांच कराना चाहते..कि दण्डित करने के लिए..हरकतें तो बचाने वाली लग रहीं..सभी..

मैं जानता हूँ..आबकारी कमिश्नर षणमुगम तो अपनी फाइल भेज चुके..शासन को..कभी का..चार्जशीट के लिए..सरकारे आला..दबा के बैठने में इंटरेस्टेड लग रही..जाने कब देगी चार्जशीट..देगी भी कि नहीं..कुछ पता नहीं..मत देना..बस फिर ये न बोलना..आप पीछे ही पड़ गए..सरकार के..शराब वालों के..अगर कुछ गलत करूँ..कहूं तो ऐसे बोलिए साहब..मुझे अहसास है..शराब मंत्री प्रकाश पन्त को महकमे के खेल का नहीं अंदाज..बिल्कुल भी नहीं..मुख्यमंत्री…अपने वजीरे आला त्रिवेंद्र सिंह रावत को और क्या होनी..जब नीचे के अफसर ही मिल जाएंगे..साजिशें रचेंगे..

इसलिए दोनों से इल्तजा..हकीकत को दीवार तोड़ के सामने लाइए..जो लोग दीवार खड़ी कर सरकार को कुछ देखने नहीं देना चाहते..उनको हंटर मारिये..जी जनाब हंटर..ये कहावत भी तो सुनी होगी न..दोनों ने..लातों के भूत..बातों से नहीं मानते..

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