देहरादून(मनीष डंगवाल)- उत्तराखंड के शिक्षा विभाग का हाल भी अजब गजब का है,मनचाहे ताबदले शिक्षा विभाग में किस तरह होते रहे है ये किसी से छुपा नहीं है,लेकिन सहुलियत के हिसाब से शिक्षकों को पढाने के लिए स्कूल मिले यहां ये भी देखने को मिला है। जी हां हम बात कर रहे है उस नियमावली कि जिसके तहत हरीश रावत की सरकार में 2016 में 400 से ज्यादा शिक्षकों के तबादले 3 से 5 सालो के लिए इस लिए किए गए कि या तो वो शिक्षक बिमार है या उनके घर में कोई बिमार है।

अरविंद पाण्डेय ने लिया तबादलों पर एक्शन

कडक मिजाज और कडक फैसलों कि लिए अपनी खास पहचान बना चुके उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री ने पहले तो बीजेपी के सत्ता में आते ही ताबदला सत्र शून्य कर दिया और फिर जैसे ही शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय को ये भनक लगी कि हरीश रावत सरकार में 2016 में 400 से ज्यादा शिक्षकों के ताबदलों में कोई खेल है,25 अप्रैल को शिक्षा मंत्री के आदेश के बाद शिक्षा विभाग से सभी 400 से ज्यादा शिक्षकों के तबादले निरस्त करते हुए उनहे मूल तैनाती पर जाने का आदेश जारी कर दिया। जिसके बाद से शिक्षकों में आक्रोश में और वह लगातार शिक्षा मंत्री का घेराव करने के साथ ही शिक्षा निदेशालय में धरने पर बैठे है।

शिक्षकों पर उठ रहे है सवाल

ताबदला निरस्त हुए शिक्षकों पर कई लोग सवाल उठा रहे है और ये सवाल शिक्षक पर इस लिए उठ रहे है कि जब स्वास्थ्य खराब होने और परिवार में किसी परेशानी के लिए शिक्षकों ने अपने ताबदले कराएं तो ताबदले निरस्त होने के बाद वह शिक्षक दो साल में ही इतने स्वस्थ कैसे हो गए कि वह स्कूलों में पढाने की वजह पूरी चुस्ती फूर्थी से धरना प्रदर्शन देने के लिए तैयार हो गए। वास्तव में अगर शिक्षक अभी भी बिमार है और वह दुर्गम में सेवाएं देने में असमर्थ हो तो कैसे पिछले 10 दिनों से भी ज्यादा समय से शिक्षक धरने पर बैठे है वह भी इस गर्मी के मौसम में भूखे प्यासे ये अपने आप में एक बडा सवाल है।

शिक्षा मंत्री को भनक

दरअसल शिक्षा मंत्री को इस बात की भनक लगी थी 400 से ज्यादा शिक्षक में से कई शिक्षक न तो काई बिमारी है और न ही उनके घर में कोई ऐसी परेशानी है कि वह दुर्गम में सेवाएं न दे सकते है इसी के चलते शिक्षा मंत्री ने सभी 400 से ज्यादा शिक्षकों के तबादले निरस्त कर दिए। कहा तो ये भी जा रहा है कि 400 में से कुछ शिक्षकों के तबादले उस समय राजनैतिक पहुंच के चलते हुए थे।

कमेटी करेंगी परिक्षण

पुख्ता जानकारी के मुताबिक शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय अब एक कमेटी का गठन करने वाले है जो कमेटी ये पता लाएगी वास्तव में 400 शिक्षक बिमार हंै या उन्के परिवार में कोई दिक्कत है। कमेटी की रिपोर्ट में जो शिक्षक बिमार पाएं जाएंगे उनके तबाले रूकना आसाना हो जाएगा और जो शिक्षक बिमार नहीं पाएं जाएंगे उनके तबादला आदेश रूकना मुश्किल हो जाएगा। कुल मिलाकर शिक्षा मंत्री अपने निर्णय पर पिछे हटने वाले नही है और शिक्षकों के दबाव में आने वाले नही है,इसी के चलते वह कमेटी का गठन करने पर विचार का रहे है। लेकिन सवाल ये भी है कि क्या अगर 2016 में गलत तरिके से शिक्षकों के तबादले इतने बडे स्तर पर हुए तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।



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