•  4.9 लाख सड़क दुर्घटनाओं में वर्ष  2017 में 1.46 लाख लोगों की मौत
  • सड़क दुर्घटनाओं से सरकार को साल में एक लाख करोड़ रू. का नुकसान
  • संसद में पेश संशोधित मोटर व्हीकल बिल के फायदे होंगे दूरगामी
  • राज्य की सड़कों का सड़क सुरक्षा ऑडिट करवाने का राज्यों को सुझाव

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

भारत को एक ऐसी प्रभावी योजना बनाने की जरूरत है, जिससे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को 50 फीसदी तक कम करने का लक्ष्य  पूरा किया जा सकेः  के. के. कपिला,अध्यक्ष, IRF 

देहरादून :   दुनियाभर में सड़क दुर्घटना से होने वाली वाली कुल 13 लाख मौतों में 11 प्रतिशत सिर्फ भारत में होती हैं ,जबकि यहां दुनिया के वाहनों का सिर्फ एक प्रतिशत ही है। वर्ष  2017 में 4.9 लाख सड़क दुर्घटनाओं में 1.46 लाख लोगों की मौत हुई।

योजना आयोग और वल्र्ड बैंक के आकलन के मुताबिक दुर्घटनाओं की सामाजिक कीमत हर साल भारत की जीडीपी का दो से तीन प्रतिशत है। मानव जीवन और दुख के अलावा सरकार को हर साल सड़क दुर्घटनाओं से एक लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

इंटरनेशनल रोड फेडरेशन के अध्यक्ष के.के. कपिला के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के पूरे विश्व में रोड सेफ्टी को लेकर बनाए एक दशकीय योजना का हस्ताक्षरकर्ता होने के कारण भारत को सड़क दुर्घटनाओं को 2020 तक 50 प्रतिशत तक कम करना है। भारत सरकार की नींद खुली और इस दिशा में पिछले कुछ समय से छोटी-छोटी कोशिशें की गई।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वैश्विक स्वास्थ्य पर सड़क दुर्घटना के प्रभावों को पहचाना और 2011-2020 को सड़क दुर्घटना रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र के दशकीय योजना के लिए चुना और 2020 तक इसे 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य तय किया है। भारत सरकार ने भी सड़क सुरक्षा को लेकर 4 ई स्तंभों इंजीनियरिंग, एजुकेशन, इनफोर्समेंट और इमरजेंसी सुविधा को अपनाकर जानलेवा सड़क हादसे को 50 प्रतिशत तक कम करने का संकल्प लिया है। इसी के तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय पूरे देश में निरंतर पहल कर रहा है।

इंटरनेशनल रोड फेडरेशन के अध्यक्ष के.के. कपिला  के अनुसार  मौजूदा मोटर व्हीकल एक्ट पुराना हो गया है और यह बदला जा रहा है। यातायात नियमों को सही तरीके से लागू करने की जरूरत पर बल देते हुए और सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों को फिर से रेगुलेट करने और नियमों के उल्लंघन करने पर दंड के प्रावधान इसमें शामिल हैं। संसद में पेश संशोधित मोटर व्हीकल बिल के फायदे दूरगामी हैं जिससे देश में सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे बहुआयामी कोशिशों में सहायक सिद्ध होगा। संसद में इस बिल के पास होने के लिए सभी दलों के दिल से समर्थन की जरूरत है ताकि बेहद कीमती इंसानी ज़िदगियों को सड़क दुर्घटनाओं से बचाया जा सके और इसके परिणाम से देश को होने वाले आर्थिक लाभ से बचाया जा सके।

यहां इस बात का उल्लेख करना भी जरूरी है कि मुख्य राजनीतिक दलों बीजेपी और कांग्रेस दोनों के एजेंडे में रोड सेफ्टी सबसे ऊपर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 जुलाई 2015 को मन की बात में सड़क दुर्घटना पर बोलते हुए रोड सेफ्टी बिल जल्द से जल्द लागू करने का संकल्प लिया था। भारतीय कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र के जरिए देश से सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया था। कई क्षेत्रीय और छोटी-छोटी राजनीतिक दलों ने सड़क दुर्घटना की समस्या को सुलझाने के लिए व्यापक सड़क सुरक्षा बिल को जल्द से जल्द लागू करने का समर्थन किया। आपकी पार्टी ने भी जनता के फायदे का हमेशा समर्थन किया है। ये बिल देशभर में सड़क हादसों से ज़िंदगियां बचाने में मदद करेगा।

इंटरनेशनल रोड फेडरेशन के अध्यक्ष के.के. कपिला के अनुसार  जानलेवा सड़क हादसों को रोकने के लिए देश को एक बड़े संकल्प लेने की जरूरत है। इंटरनेशनल रोड फेडरेशन गतिशीलता की कीमत पर जिंदगी और अंगों के नुकसान को अस्वीकार करते हुए सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए संकल्पित है। और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए बड़े समुदायों और हितधारकों को अलग-अलग जागरूकता अभियानों में शामिल कर सड़क दुर्घटना से हुई मौतों को कम करने की कोशिश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

वर्तमान में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें बहुप्रतीक्षित मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव, इंजीनियरिंग आधारित सड़कों के सुधार, सड़क कंस्ट्रक्शन के सभी स्तरों पर सड़क सुरक्षा ऑडिट और इसके अलावा भारत में सड़क दुर्घटना से होने वाली 90 प्रतिशत मौतों के मुख्य कारणों को पहचानना और उसके उपाय भी शामिल हैं।

मोटर व्हीकल एक्ट अमेंडमेंट बिल जो कि संसद में तुरंत प्रभाव से पास हो जाना चाहिए, इसमें सही दंड का प्रावधान है। इसके साथ ही जनजागरुकता के नियम जो कि सड़क दुर्घटना से होने वाली नुकसान और मौतों को कम करने का एक मुख्य कारण है भी इसमें शामिल है। जब मोटर व्हीकल अमेंडमेंट बिल पास हो जाएगा और लागू होगा तब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को भारी जुर्माना चुकाना होगा, ओवर स्पीडिंग और शराब पीकर गाड़ी चलाने पर मौजूदा जुर्माने से लगभग दस गुना ज्यादा जुर्माना देना होगा। इस बिल में हिट एंड रन से हुई मौतों पर मुआवजे को बढ़ाकर एक लाख रुपए और इसी मामले में घायल होने पर 50 हजार रुपए देने का प्रावधान है। यह सड़क सुरक्षा नियमों को मजबूत करने में मदद करेगा और देश में सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

केंद्र सरकार और सड़क परिवहन एवं हाई-वे मंत्रालय ने सांसदों के लोकल फंड का इस्तेमाल रेलवे क्रॉसिंग पर बने पुल की सड़कों को बनाने, रेलवे क्रॉसिंग के फुटओवर ब्रिज, रोड डायवर्जन, फुटपाथ और साइकिल ट्रैक में करने की इजाजत दे दी है। और ये सभी काम दुर्घटनाओं और मौतों में कमी लाने में सहायक होंगे। वित्तीय वर्ष 2012-13 के बजट में केन्द्र सरकार ने रोड सेफ्टी की दिशा में काम करने वालों को इनकम टैक्स पर 50 प्रतिशत छूट की घोषणा की थी। सड़क सुरक्षा के कामों के बदले इनकम टैक्स में दी गई छूट को 100 फीसदी तक बढ़ाने से लोगों को प्रोत्साहन मिलेगा।

सड़क परिवहन एवं हाई-वे मंत्रालय ने भी राज्यों को सड़क सुरक्षा के लिए तकनीकी बनावट पर रोड कंस्ट्रक्शन फंड का 10 प्रतिशत खर्च करने की अनुमति दे दी है। दिल्ली समेत देशभर की सभी प्रमुख शहरों में रोड मिनिस्ट्री ने आईआरएफ  के साथ मिलकर साइकिल पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप चिपकाने की पहल शुरू की थी। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने एक्सीडेंट के ग्रोथ रेट को कम करने के लिए पांच साल का लक्ष्य निर्धारित किया है।

जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों में सड़क तकनीकी विकास, अलग साइकल लेन, हर 50 किलोमीटर पर हाईवे पर गाड़ियों के लिए स्टैंड बनाने, सही चेतावनी बोर्ड और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का सुधार शामिल है। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अपने सिलेबस के विभिन्न विषयों में सड़क सुरक्षा को शामिल करने के लिए सहमत हो गया है। और इस तरीके से छात्रों को वर्तमान पाठ्यक्रम के विषयों जैसे अंग्रेजी, हिंदी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के अलावा नए सब्जेक्ट के बोझ से बचा लिया। राजस्थान सरकार ने तो सड़क सुरक्षा सुरक्षा पाठ्यक्रम को अपने स्कूलों में सम्मिलित भी कर लिया है और दूसरे राज्यों में भी यह किया जाएगा।

आईआरएफ ने राज्य सरकार द्वारा राज्य की सड़कों का सड़क सुरक्षा ऑडिट करवाने का सुझाव भी दिया है। दुनियाभर में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सड़क सुरक्षा ऑडिट करवाए जाते हैं, इन ऑडिट्स में सड़क डिजाइन की गलतियों में सुधार शामिल है जो कि सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है। आईआरएफ सड़क सुरक्षा ऑडिटर्स को प्रशिक्षित करने में मदद कर सकता है। क्योंकि इसने हमारे देश में अब तक 500 रोड ऑडिटर्स को ट्रेनिंग दी है।

आईआरएफ ने सड़क परिवहन और हाइवे मंत्रालय को कम लेकिन सुरक्षित सड़के बनाने का सुझाव भी दिया है। सरकार को चाहिए कि वह नई सड़कों का सुरक्षा पहलुओं के साथ निर्माण पर जोर दे, जिनमें अंडरपास, फ्लाईओवर्स और बिना ब्लैक स्पॉट की सड़कें शामिल हैं। क्योंकि वर्तमान सड़कों पर ब्लैक स्पॉट को हटाना और दूसरे सुरक्षित पहलुओं पर काम करना ज्यादा महंगा पड़ेगा।

सड़क को सुरक्षित बनाने के दूसरे सुझावों में उन क्षेत्रों में जहां पैदलयात्री और गाड़ियां साथ चलते हैं वहां ट्रैवलिंग स्पीड को कम करना और स्पीड को सही तरीके से लागू करना, और बसों द्वारा कई जगहों पर रुकने जैसी खतरनाक गतिविधियों को रोकना, अवैध वाहन पार्किंग को रोकना, जोकि पैदलयात्रियों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर करते हैं। मीडियम फेंसिंग का निर्माण, फुटब्रिज, मिड ब्लॉक सिग्नल, स्पीड ब्रेकर और स्पीड जोन कंट्रोल मार्किंग जैसे उपाय शामिल हैं।

केन्द्र और राज्य सरकारों को इंटरनेशनल रोड फेडरेशन  द्वारा दिए गए सुझावों में से कुछ हैं- राज्य में सभी प्रमुख हाईवे से जुड़े अस्पतालों में दुर्घटनाग्रस्त पीड़ितों के लिए सभी उपकरणों से लैस ट्रॉमा सेंटर, क्योंकि सही समय पर दिया गया सही इलाज दुर्घटनाग्रस्त लोगों की जान बचा सकता है। सभी हाईवे और प्रमुख सड़कों पर इन ट्रॉमा सेंटर्स की सही जानकारी फोन नंबरों के साथ रोड साइन पर दी जानी चाहिए। राज्य सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दुर्घटना पीड़ित व्यक्ति की मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति को पुलिस परेशान ना करे।

इंटरनेशनल रोड फेडरेशन  की ओर से दिए गए दूसरे सुझावों में ट्रैफिक नियमों को लागू करना और मोटर व्हीकल एक्ट 1998 के प्रावधानों को लागू करना शामिल है। इन नियमों में हेल्मेट पहनना, ट्रकों और बसों में रिफ्लेक्टिव टेप का उपयोग, ट्रकों और बसों में साइड और रेयर व्यू की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण और गाड़ियों में ओवरलोडिंग के खिलाफ कड़े कदम उठाना, 125 सीसी से ज्यादा के टू व्हीलर्स के लिए एबीएस ब्रेक्स लगाना और मोटर गाड़ियों के लिए रेयर व्यू सेंसर लगाना शामिल हैं।

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