देहरादून : 27 जुलाई को एक सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने वाला है। 21वीं सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा। इस चंद्र ग्रहण की अवधि 1 घंटे 43 मिनट की होगी। लेकिन चन्द्रग्रहण शुरू होने से अंत होने तक का समय काल लगभग  4 घंटे का रहेगा। इस दौरान पृथ्‍वी का उपग्रह यानी कि चंद्रमा खूबसूरत लाल या भूरे रंग का दिखाई देगा।वैज्ञानिकों ने इस चंद्र ग्रहण को ब्‍लड मून (Blood Moon) का नाम दिया है। इस दौरान चंद्रमा खूबसूरत लाल या भूरे रंग का दिखाई देगा।

इससे पहले 31 जनवरी को इस साल पूर्ण चन्द्रग्रहण लगा था जिसमें करीब 1 घंटे 16 मिनट का खग्रास था। अब 27 और 28 जुलाई की मध्य रात्रि में लगने वाले चन्द्रग्रहण में करीब 1 घंटे 43 मिनट का खग्रास रहेगा। इस चन्द्रग्रहण शुरू होने से अंत होने तक करीब 4 घंटे का रहेगा। खगोल वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह 21वीं सदी का सबसे लंबा चन्द्रग्रहण होगा। भारत के अलावा यह चन्द्रग्रहण संपूर्ण एशिया, यूरोप, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागर क्षेत्र में देखा जा सकेगा। ग्रहण का आरंभ 27 जुलाई की मध्य रात्रि में 11 बजकर 54 मिनट पर होगा और इसका मोक्ष काल यानी अंत 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर होगा।

  • क्‍या होता है ब्‍लड मून (Blood Moon)?

चंद्रग्रहण के दौरान चांद लाल दिखता है जिसे ब्लड मून अर्थात रक्तिम चांद कहा जाता है. दरअसल, पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चांद जब धरती की छाया में रहता है तो इसकी आभा रक्तिम हो जाती है जिसे रक्तिम चंद्र या लाल चांद कहते हैं। ऐसा तब होता है जब चांद पूरी तरह से धरती की आभा में ढक जाता है। ऐसे में भी सूरज की ‘लाल’ किरणें ‘स्कैटर’ होकर चांद तक पहुंचती है।

  • क्‍या होता है चंद ग्रहण (Lunar Eclipse)?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी एवं चंद्रमा ऐसी स्थिति में होते हैं कि कुछ समय के लिए पूरा चांद अंतरिक्ष में धरती की छाया से गुजरता है। लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते वक्त सूर्य की लालिमा वायुमंडल में बिखर जाती है और चंद्रमा की सतह पर पड़ती है। इसे ब्लड मून भी कहा जाता है।

  • कैसे देखें चंद्र ग्रहण ?

सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी खास उपकरण या चश्मे की जरूरत नहीं होती है।चंद्र ग्रहण का नजरा खुली आंखों से देखा जा सकता है और यह पूरी तरह सुरक्षित है।दरअसल, सूर्य ग्रहण के दौरान सोलर रेडिएशन से आंखों के नाजुक टिशू डैमेज हो जाते है, जिस वजह से आखों में विजन – इशू यानि देखने में दिक्कत हो सकती है। इसे रेटिनल सनबर्न भी कहते हैं। ये परेशानी कुछ वक्त या फिर हमेशा के लिए भी हो सकती है। लेकिन चंद्र ग्रहण के दौरान ऐसा नहीं होता। इस दिन चांद को खुली आंखों से देखने से कोई नुकसान नहीं होता।

  • चन्द्रग्रहण के राशियों पर प्रभाव और कुप्रभाव :-

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस राशि में चन्द्रग्रहण होता है उस राशि के लोगों को कष्ट का सामना करना पड़ता है। ग्रहण मकर राशि में होने के कारण इस राशि के लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीँ कुछ ज्योतिषियों के अनुसार इस ग्रहण का प्रभाव चार राशियों मेष, सिंह, वृश्चिक व मीन पर पर शुभ माना जाएगा। वहीं कुंभ, तुला, कर्क व वृष राशि पर मध्यम प्रभाव पड़ेगा। मकर, मिथुन, कन्या व धनु राशि पर अशुभ माना गया है। इस राशि के लोग ग्रहण के समय भगवन शिव की आराधना कर अनुकूल प्रभाव बना सकते है। चंद्रग्रहण का गोचर के अनुसार अलग- अलग प्रभाव होता है। चंद्रग्रहण पर सभी को दान पुण्य करना चाहिए इसका अधिक लाभ मिलता है।

ग्रहण से जहां कई राशियों को अशुभ फल मिलने की आशंका है वहीं कुछ राशियों को लाभ और शुभ फल भी मिलने वाला है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मिथुन, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के लिए यह ग्रहण शुभ रहेगा। राजनीतिक दृष्टि से यह ग्रहण ब्लूचिस्तान एवं कश्मीर में राजनीतिक अपद्रव को बढाने वाला है। इन क्षेत्रों में आतंकी घटनाएं हो सकती हैं। सफेद वस्तुओं और चांदी, मोती एवं घतुओं के दाम बढ़ेंगे।

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