• पुलिस व आई.आई.एम.प्रशासन ने नहीं की कोई विस्तृत जांच

काशीपुर : बीती नवम्बर 2017 में देश के 20 सबसे उत्कृष्ट मैनेजमेंट संस्थानों में शामिल भारतीय प्रबंध संस्थान (आई.आई.एम) काशीपुर में प्रथम वर्ष के एक 22 वर्षीय छात्र ने कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले ने न तो पुलिस ने और न ही आई.आई.एम. ने कोई गम्भीरता दिखायी और न ही कोई सबक सीखा। पुलिस ने बिना कोई विस्तृत जांच किये दिसम्बर 2017 में ही फाइल बन्द कर दी जबकि आई.आई.एम. ने कमरों में एंटी सुसाइडल रॉड लगाने की कार्यवाही करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। यह खुलासा सूचना अधिकार के अन्तर्गत पुलिस व आई.आई.एम. द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचनाओं से हुआ है।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने भारतीय प्रबंध संस्थान काशीपुर तथा पुलिस विभाग के लोक सूचनाधिकारियों से भारतीय प्रबंध संस्थान काशीपुर के छात्रावास के भवन में संस्थान के छात्र का शव गत 17 नवम्बर 2017 को मिलने की जांच तथा ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये कार्यवाही की सूचना मांगी है। इसके उत्तर में भारतीय प्रबंध संस्थान के लोक सूचनाधिकारी द्वारा उनके 22-01-2018 तथा 19-04-2018 के पत्र से स्पष्ट किया गया है कि इस सम्बन्ध में आई.आई.एम. द्वारा कोई जांच या कार्यवाही नहीं की गयी केवल भविष्य में ऐसी घटनायें रोकने के लिये एंटी सुसाइडल फैन रॉड लगाए जा रहे हैं। जो घटना के छः माह बाद तक भी नहीं लग पाये हैं।

श्री नदीम को पुलिस विभाग की ओर से लोकसूचना अधिकारी/प्रभारी निरीक्षक काशीपुर तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी/क्षेत्राधिकारी पुलिस काशीपुर द्वारा सूचना उपलब्ध करायी है उससे भी स्पष्ट है कि इस मामले की फाइल घटना के एक माह बाद ही 13-12-2017 को दफ्तर दाखिल करने हेतु क्षेत्राधिकारी कार्यालय को प्रेषित कर दी गयी है। पुलिस क्षेत्राधिकारी द्वारा दिनांक 31-05-2018 को उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार काशीपुर थाने के रिपोर्टिंग पुलिस चौकी के प्रभारी उपनिरीक्षक द्वारा जांच रिपोर्ट 12-12-2017 को दी गयी है।

इस रिपोर्ट के अनुसार पी.एम.आर. (पोस्ट मार्टम रिपोर्ट) की जांच उनके द्वारा की गयी तो वाकयात इस प्रकार पाये गये कि मृतक यशवसन्ती भाई आई.आई.एम.काशीपुर का छात्र था जिसने दिनांक 17-11-17 को अपने कमरे में पंखे से लटक कर आत्म हत्या की ली थी तथा मृतक के परिजनों द्वारा इस सम्बन्ध में कोई अभियोग/शिकायत नहीं करायी तथा जांच से किसी अपराध का होना नहीं पाया गया है। अतः वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से निवेदन किया गया है कि पी.एम.आर.जांच आख्या दाखिल दफ्तर करने की कृपा करें।

श्री नदीम को क्षेत्राधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी पोस्ट मार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट प्रमाणित है कि पोस्टमार्टम के समय (18-10-17 की सुबह सवा दस बजे) से 24 से 36 घंटे पूर्व छात्र की मृत्यु दम घुटने से हुई थी और उसके नाखून उस समय तक नीले पड़ गये थे। इस मामले में विभिन्न प्रश्न अब भी अनुसुझे रह गये हैं जिनकी आई.आई.एम. प्रशासन तथा पुलिस ने कोई जांच ही नहीं की है।

आत्महत्या मामले की फाइल बन्द पर उठे कई सवाल ?

  • पहला प्रश्न यह कि परीक्षा के दिनों भी छात्रों की सूचना संस्थान प्रशासन को क्यों नहीं रहती है। अगर ऐसा नहीं है लगभग 24 घंटे मृत शरीर पंखे से कैसे टंगा रहा।
  • दूसरा प्रश्न पुलिस ने सुसाइड नोट का पूर्ण विवरण जांच में क्यों नहीं लिखा और उसके राइटिंग आदि व सत्यता की जांच क्यों नहीं की गयी है।
  • तीसरा प्रश्न यदि सुसाइट नोट में एजुकेशन सिस्टम और आरक्षण से तंग आकर यह कदम उठाने की बात लिखी है तो इस ओर ध्यान देकर आई.आई.एम. द्वारा छात्रों की काउंसिलिंग करके उनकी भ्रांति समाधान व उन्हें ऐसे कदम उठाने से रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया गया है। वहीँ यहाँ यह बात भी उल्लेखनीय है कि शव मिलने के समय पत्रकारों तथा प्रथम अपील की सुनवाई के समय क्षेत्राधिकारी पुलिस द्वारा श्री नदीम को सुसाइड नोट में यह लिखा होना बताया गया था। इस सुसाइड नोट की प्रति सील होना कहकर नहीं दी गयी है।
  • चौथा प्रश्न संस्थान में छात्र में निराशाबादी सोच कैसे पनपी, यदि छात्रों में ऐसी निराशावादी सोच पनप रही है तो रोकने के लिये संस्थान प्रशासन ने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की।
  • पांचवा प्रश्न छात्र की आत्महत्या तथा उसका शव लंबे समय तक पंखे से टंगा रहना संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था की कमी का प्रमाण है। एक होनहार 22 वर्षीय छात्र को खोकर भी इसकी कोई जांच तथा भविष्य में ऐसी घटना रोकने को प्रभावी कदम अब भी क्यों  नहीं उठाये गये।



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