भगोड़ा शराब कारोबारी विजय माल्या ने एक और खुलासा किया. मंगलवार को उसने पांच पन्नों की प्रेस रिलीज + जारी करके दावा किया कि उसने बैंक कर्जों को लेकर 15 अप्रैल 2016 को प्रधानंत्री और वित्त मंत्री को चिट्ठी लिखी थी जिसका उसे कोई जवाब नहीं मिला.

माल्या ने मंगलवार को देर रात तीन ट्वीट्स किए और कहा, ‘कुछ लोग लगातार पूछ रहे हैं कि मैंने इसी वक्त यह बयान क्यों दिया है. मैंने यह बयान इसलिए दिया क्योंकि यूबीएचएल और मैंने माननीय कर्नाटक हाई कोर्ट में 22 जून, 2018 को आवेदन दिया जिसमें हमारे पास उपलब्ध करीब 13,900 करोड़ रुपये की संपत्तियों का ब्योरा है.’

अब उसने सफाई दी है कि आखिर इस बात का खुलासा उसने अभी क्यों किया. अपनी सफाई में माल्या ने कहा कि उसकी मंशा बैंकों का कर्ज चुकाने की है, इसलिए शराब कंपनी यूनाइटेड ब्रूअरीज होल्डिंग्स लि. (यूबीएचएल) और खुद उसने कर्नाटक हाई कोर्ट में आवेदन देकर इसका रास्ता तैयार करने की अपील की है.

माल्या का कहना है कि वह बैंकों के कर्ज चुकाने के लिए अपनी इन संपत्तियों को बेचने की अनुमति चाहता है. उसने लिखा, ‘हमने अदालत से न्यायिक देखरेख में ये सभी संपत्तियां बेचने और सरकारी बैंकों समेत तमाम कर्जदाताओं के लोन की रकम वापस करने की अनुमति मांगी है.’

माल्या को संदेह है कि मामले की जांच कर रही ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियां इसमें अड़ंगा डालेंगीं. उसका कहना है कि अगर एजेंसियों ने ऐसा किया तो कम-से-कम उनका चेहरा तो उजागर हो जाएगा. माल्या ने लिखा, ‘अगर ईडी या सीबीआई जैसी क्रिमिनल (केस जांच) एजेंसी संपत्तियां बेचने पर आपत्ति दर्ज कराती है तो स्पष्ट हो जाएगा कि बकाया वसूली के इतर मेरे यानी ‘पोस्टर बॉय’ के खिलाफ इनका अजेंडा है. मैं बैंकों का कर्ज चुकाने के प्रति सच्चे दिल से सारे प्रयास करता रहा हूं. अगर राजनीति से प्रेरित तथ्यों का दखल होगा तो मैं खुछ नहीं कर सकता.’



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