• पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के शासनकाल में भी कर चुकी है बदसलूकी

देहरादून : मुख्यमंत्री के जनता दरबार में एक अध्यापिका को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत  जनता दरबार में  बदसलूकी पूर्ण व्यवहार करना तब भारी पड़ा जब मुख्यमंत्री के बार-बार उसे संयमित भाषा का प्रयोग करने की हिदायत दी गयी लेकिन जब महिला नहीं मानी तो मुख्यमंत्री को विवश होकर उसे जनता दरबार हॉल से बाहर करने का निर्देश देना पड़ा महिला यहीं शांत नहीं हुई वह लगातार अपशब्दों का प्रयोग करती रही तो आखिरकार मुख्यमंत्री को उसे गिरफ्तार करने के आदेश देने पड़े। गौरतलब हो यह वही महिला है जिसे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के शासनकाल में भी बदसलूकी पर निलंबित किया जा चुका है। 

घटना आज प्रातः मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत द्वारा लगाए गए जनता दरबार की है।  पहले सब कुछ शांति से जनता दरबार चल रहा था।  मुख्यमंत्री जनता की शिकायतों को सुनने के साथ ही उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। इस दौरान कई फरियादियों की समस्याओं का मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत द्वारा समाधान भी मौके पर ही किया गया।  कई लोग अपनी समस्याओं के समाधान और कुछ अपनी शिकायतों की सुनवाई से खुश भी नज़र आ रहे थे।

इतने में एक महिला जिसका नाम उत्तरा पंत बहुगुणा बताया गया अपनी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री के सामने मुखातिब हुई और उसने अपना स्थानांतरण नौगांव उत्तरकाशी से देहरादून के लिए अपनी बात रखी । महिला का कहना था उसके पति की मृत्यु के बाद उसके बच्चे देहरादून में रहते हैं जिन्हे देखने वाला कोई नहीं है।  मुख्यमंत्री इस महिला की बात बहुत ही संजीदगी से सुन ही रहे थे कि महिला ने अचानक आपा खोते हुए मुख्यमंत्री को इंगित करते हुए अपशब्दों की बौछार शुरू कर दी। जनता दरबार हाल में महिला के अचानक बदले तेवरों और अपशब्दों की बौछार से हर कोई हतप्रभ हो गया। 

महिला द्वारा लगतार बदसलूकी के बाद मुख्यमंत्री ने उसे जनता दर्शन हॉल से बाहर जाने को कहा लेकिन महिला इसके बाद भी लगातार अपशब्दों का प्रयोग करती रही। अन्तः मुख्यमंत्री को मजबूरी में महिला को गिरफ्तार करने के आदेश वहां उपस्थित पुलिस अधिकारियों को देने पड़े  जिसके बाद पुलिस के महिला सुरक्षा कर्मियों ने महिला को हिरासत में ले लिया और उसे कैंट थाने ले गए  जहाँ से उसे घर भेज दिया गया । 

गौरतलब हो कि  इसी महिला द्वारा हरीश रावत सरकार के दौरान सचिवालय में लगे जनता दर्शन कार्यक्रम में हंगामा खड़ा किया गया था जिसके बाद से ही यह महिला अध्यापिका   निलंबित चल रही है। गुरुवार को एक बार फिर इस गुरु ने अपने व्यवहार से सूबे के शिक्षकों  के आम व्यवहार को लेकर सोचने पर मजबूर कर  दिया है कि राज्य में कहीं न कहीं  अब शिक्षकों को  सामने वाले की गरिमा और अपने व्यवहार और आचरण के बारे में सोचना होगा।

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