12 जून से कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू हो जाएगी। हर साल की तरह सैकड़ों यात्री यात्रा करने जाएंगे। कैलाश मानसरोवर को भगवान शिव और पार्वती का घर माना जाता है। यहां योगी, दानव, मुनष्य, देवगण सभी भगवान शिव की उपासना के लिए आते हैं तो चलिए जानते हैं कैलाश मानसरोवर के बारे में कुछ रोचक बातें।

कहते हैं कि जैसे – जैसे श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर बढ़ते हैं, वैसे- वैसे उन्हें दिव्यता का अनुभव होता है। ऐसा लगता है, जैसे किसी दूसरी दुनिया में आ गए हों। माना जाता है कि यह स्थान ब्रह्मा जी ने अपने मन और मस्तिष्क से बनाय है। दरअसल, मानसरोवर संस्कृत के मानस (मस्तिष्क) और सरोवर (झील) शब्द से बना है।

किंवतियों की मानें तो जो व्यक्ति इस झील की धरती को छू लेता है, वह ब्रह्मा जी के बनाए स्वर्ग में जाता है और जो व्यक्ति इस झील का पानी पीता है, वह शिव जी के बनाए स्वर्ग में जाता है।

मानसरोवर के यात्रा के दौरान पर्वत पर बर्फ से ऊं बन जाता है। सूर्य की पहली किरण जब कैलाश पर पड़ती है तो यह सोने का सा प्रतीत होता है। कहा जाता है कि यहां ब्रह्ममुहुर्त में 3 से 4 बजे  देवगण स्नान के लिए आते हैं। ग्रंथों के अनुसार इस जगह पर देवी सती का हाथ गिरा था, जिससे यह झील बनी। इसलिए इसे भी 51 शाक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

गर्मियों के दिनों में जब बर्फ पिघलती हैं तो यहां एक अलग ही आवाज सुनाई देती हैं। लोगों का मानना है कि नीलकमल भी सिर्फ मानसरोवर में ही खिलते हैं। कैलाश पर्वत की चार दिशाओं से चार नदियों का उद्गम हुआ है ब्रह्मपुत्र, सिंधू, सतलज व करनाली। इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदियां भी निकली है।

कैलाश के चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुख है जिसमें से नदियों का उद्गम होता है, पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का मुख है, उत्तर में सिंह का मुख है, दक्षिण में मोर का मुख है।

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