देहरादून। जनता दरबार में न्याय मांगने आई महिला टीचर को सस्पेंड करने के बाद अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत खुद ही घिरे हुए नजर आ रहें हैं। सामने आई एक आरटीआई में जहां उनकी अपनी पत्नी के बीस सालों से देहरादून में जमे होने का खुलासा हुआ है वहीं सोशल मीडिया पर त्रिवेंद्र रावत को राज्य की जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब न बीजेपी को जवाब देते बन रहा है और न ही सीएम के अन्य सहयोगियों को।

दरअसल सीएम ने महिला टीचर के ट्रांसफर की गुहार लगाने के बाद उससे पूछा था कि नौकरी करने से पहले क्या सोचा था। सीएम उस महिला टीचर को ये बताना चाहते थे कि नौकरी करनी है तो दुर्गम में करनी होगी। चूंकि महिला 20 सालों से दुर्गम में ही काम कर रही है लिहाजा उसकी निराशा तल्ख शब्दों में सीएम के सामने आ गई थी।

फिर शुक्रवार को सामने आई एक आरटीआई से खुलासा होने के बाद अब सीएम खुद ही कठघरे में आ गए हैं। महिला टीचर को दुर्गम सुगम और नौकरी पर ज्ञान देने वाले सीएम रावत की पत्नी खुद ही पिछले 22 सालों से सुगम में जमी हुईं हैं। सीएम की पत्नी के लिए सारे नियम काएदे ताख पर रख दिए गए हैं। सियासी रसूख और जान पहचान के चलते सीएम की पत्नी सालों से देहरादून में ही डटी हुईं हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो सीएम की पत्नी का प्रमोशन भी हुआ लेकिन बावजूद इसके वो देहरादून छोड़ कर नहीं गईं। जबकि नियमों के मुताबिक प्रमोशन के लिए दुर्गम जाना होता है।

वहीं नेशनल मीडिया में सीएम त्रिवेंद्र रावत की खूब जमकर खिंचाई हो रही है। सीएम के खिलाफ सबसे अधिक नाराजगी सोशल मीडिया में देखने को मिल रही है। लोग सीएम के महिला टीचर के साथ व्यवहार को गलत तो ठहरा ही रहें हैं। साथ ही अब आरटीआई के जरिए भी सीएम पर निशाना साध रहें हैं।



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