देहरादून(हिमांशु चौहान)-उत्तराखंड में मचे शिक्षिका प्रकरण के बवाल के बाद अब सरकार की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं कियों कि सीएम समेत कई मंत्री-विधायकों की पत्नियां कई सालों से एक ही जगह पोस्टेड हैं और सुगम में सेवाएं दे रही हैं.

लेकिन शिक्षा विभाग ट्रांसफर एक्ट के तहत चलता है तो हो सकता है की सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की पत्नी सुनीता रावत को भी पहाड़ चढ़ना पड़ सकता है. इतना ही नहीं सरकार के कई मंत्री और विधायकों के खास लोग भी पहाड़ चढ़ने पर मजबूर हो जायेंगे।

उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में उत्तरा प्रकरण की कानाफूसी

बीते रोज सीएम दरबार में उत्तरा पंत बहुगुणा के हंगामे के बाद जिस तरह से मामला तूल पकड़ा है उससे ना केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में मुख्यमंत्री के ओहदे को लेकर सवाल खड़े होने लाजमी है. मामला चर्चा में आने के बाद मिडिया के सामने रूबरू होते हुए जिस दमखम से शासन की शिक्षा सचिव डॉ भूपेंद्र कोर औलख ने कहा की स्थांतरण एक्ट प्रभावी होने के बाद अब कोई भी ट्रांसफर एक्ट के अनुरूप ही होंगे यानी जिन शिक्षकों वा कर्मियों ने अपने सेवा काल में सुगम स्थानों पर सेवा दी है उन्हें एक्ट के अनुसार दुर्गम यानी पहाड़ तो चढ़ना पड़ेगा.

एक्ट को लेकर हुई कोई हीलाहवाली तो सरकार की दोहरी नीति पर पर कोर्ट में कर सकते हैं याचिका

अगर ऐसा हुआ तो सीएम से लेकर बीजेपी और कांग्रेस के रसूकदार नेताओं की पत्नियों को एक्ट का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. अगर शासन वा विभाग के अधिकारी एक्ट को लेकर कोई हीलाहवाली करते हैं तो सरकार की दोहरी नीति को लेकर जनहित याचिका या कोई भी व्यक्ति इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकता है ये भी सम्भावनायें प्रभल होती जा रही है।

तमाम संगठन शिक्षिका के पक्ष में उतरे

सीएम दरबार में विपदा की मार झेल रही उत्तरा पंत के साथ सीएम दरबार में हुए दर्व्यवहार के बाद तमाम महिला संगठनों और सामाजिक संगठनो से लेकर राजनैतिक दलों ने मुख्यमंत्री के द्वारा प्रयोग किये गए शब्दों पर अफसोस जाहिर किया है।

त्रिवेंद्र रावत की पत्नी सुनीता रावत 22 सालों से देहरादून में

अलबत्ता जिस फ़रियाद को लेकर उत्तरा प्रदेश के मुखिया होने के नाते सीएम के दरबार पहुंची थी वहाँ कोई आशा की किरण दिखने के वजहें उसे उसे दरबार से धुतकारा गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पत्नी सुनीता रावत बीते 20 सालों से भी ज्यादा समय से देहरादून में तैनात हैं जबकि उनकी शुरुआती तैनाती पौड़ी गढ़वाल में हुई थी.

एक्ट के तहत जो भी शिक्षक आते हैं उनको वापस पहाड़ों में चलना होगा-सीएम

अब इस पूरे विवाद के बाद मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट का कहना है कि एक्ट के तहत जो भी शिक्षक आते हैं उनको वापस पहाड़ों में चलना होगा मुख्यमंत्री की पत्नी पर पूछे गए सवाल पर उनका कहना है कि खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कानून की इज्जत करते हैं लिहाजा अगर जरूरत पड़ी तो यह एक्ट मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पत्नी पर भी लागू होगा आपको बता दें कि मुख्यमंत्री की पत्नी सुनीता रावत की पहली  नियुक्ति 24/3/1992 को प्राo विo कफलडी स्वीत पौड़ी हुई थी उसके बाद 26/7/1992 प्रा. वि. मैन्द्रोली पौड़ी गढ़वाल ओर फिर 27/08/1996 प्रा.वि. अजबपुर कला देहरादून 24/05/2008 पू.मा.वि. अजबपुर कला देहरादून में कर दिया गया यानी लगभग 22 साल से सुगम में नियुक्ति है।

मंत्री प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत भी राजपुर रोड़ देहरादून में तैनात है

इतना ही नहीं मंत्री प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत भी राजपुर रोड़ देहरादून में तैनात है यही नही बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला की पत्नी उषा गैरोला भी सरकार बनने के बाद देहरादून में स्थानांतरण कर दिया गया । सरकार में कई ऐसे मंत्री विधायक मौजूद है जिनकी पत्नियां दुर्गम से सुगम में लाई गई है लिहाजा अब यह बहस तेज हो गई है कि जिस तरह से उत्तरा को जवाब दिया गया है क्या इन नेताओं की पत्नियां भी पहाड़ों पर चलेंगी।

 



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