देहरादून(मनीष डंगवाल)- सीएम आवास में अपनी ट्रांसफर करने की मांग को लेकर हंगामा करने वाली महिला शिक्षिका से बंसत बिहार थाने में खबर उत्तराखंड के संवाददाता ने बातचीत की. जिसमें शिक्षिका ने कहा कि उन्होने जो हंगामा सीएम जनता दरबार में किया है वह उचित है, क्योंकि शिक्षा विभाग उन्के साथ भेदभाव कर रहा है.

57 साल की उम्र में अब दुर्गम में सेवाएं देना उनके लिए मुश्किल

57 साल की उम्र उनकी हो चुकी है और अब दुर्गम में सेवाएं देना उनके लिए मुश्किल हो रहा है क्योंकि उनके पति के मृत्य हो चुकी है उन्के दो बच्चों की रेख देख करने वाला कोई नहीं है,इसलिए 2015 में जब उनके पति की मृत्य हो गई थी तब से वह मांग कर रही है कि उनका तबादला वहां से देहरादून किया जाएं.

 जहां है स्कूल वहां के लोग करते हैं दुव्यवहार 

साथ ही शिक्षिका का कहना है कि राजकीय प्राथामिक विद्याालय ज्येष्ठवाड़ी में वह पढ़ाती है उस गांव के कुछ लोगों उसके साथ दुव्यवहार कर रहे हैं जिस वहज से वह वहां नहीं पढ़ाना चाहती है.

एक बाप से भी कोई अगर कुछ मांगता है तो उसके लिए जिद करनी पडती है

सीएम के साथ हुए विवाद को लेकर शिक्षिका का कहना कि एक बाप से भी कोई अगर कुछ मांगता है तो उसके लिए जिद करनी पडती है इसलिए उनहोने जो कुछ किया है उसे वह गलत नहीं मानती है,यहां तक की पूर्व सीएम हरीश रावत से भी उन्होने ताबदले की मांग देहरादून की थी,लेकिन हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उनका तबादला नहीं हुआ और अब वह शिक्षा विभाग के अधिकारियों से तंग आ गई है इसलिए मुझे ऐसा करना पड़ा.

5 महीने पहले भी सचिवालय में सीएम से मिली थी, मिला था आश्वासन

सीमए त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी 5 महीने पहले सचिवालय में वह मिली थी और सीएम ने तबादला करने का आश्वासन दिया था.

छुट्टी के दिन नहीं किया जा सकता सस्पेंड

लेकिन अभी तक नहीं हुआ जहां तक सीमए ने सस्पेंड करने की बात कही है तो वह कहना चाहती है आजकल गर्मियों की छुट्टियों पड़ी हुई और छुट्टियों में किसी को भी सस्पेंड नहीं किया जाता है।



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