रुड़की- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की की एक टीम ने मोटरसाइकल यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित इन्फ्लेटेबल हेलमेंट का विकास किया है। इन्फ्लेटेबल हेलमेंट का कांसेप्ट इन्फ्लेटेबल स्पेस स्ट्रक्चर से लिया गया है जो कम कीमत पर कई स्पेस एप्लीकेशंस के लिए उपयुक्त होते हैं। इन्फ्लेटेबल स्ट्रक्चर को मोड़ कर छोटे लांच वाहन के श्राउड में रख सकते हैं और इसमें थोड़ा गैस भर कर स्पेस में खोल सकते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं में हर साल भारत में लगभग 12 लाख लोग दम तोड़ते

सड़क दुर्घटनाओं में हर साल भारत में लगभग 12 लाख लोग दम तोड़ते हैं। लाखों अन्य जख़्मी या अपंग हो जाते हैं। आज कुल मोटर चालित वाहनों में 69 प्रतिशत मोटर चालित दुपहिया हैं जो धनी देशों से बहुत अधिक हैं और भारत की 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं मोटर चालित दुपहिया के साथ होती हैं। परंतु आम हेल्मेट जख़्मी होने से बचाने में पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते हैं। साथ ही, जानकार बताते हैं कि ये हेल्मेट चालक को सतर्कता और तत्परता दिखाने में बाधक हैं। तेज रफ़्तार पर हेल्मेट की सुरक्षा काम नहीं आती जिससे गंभीर जख़्मी होने का खतरा बढ़ जाता है।

टक्कर की स्थिति भांपने के लिए रफ़्तार, लीन एंगल, आवेग आदि मानकों को माप लेता

इन्फ्लेटेबल हेल्मेट आप गर्दन में पहन सकते हैं और ये काॅलर की तरह मुड़े होते हैं। इस डिवाइस में सेंसर लगे हैं जो इम्पैक्ट या टक्कर की स्थिति भांपने के लिए रफ़्तार, लीन एंगल, आवेग आदि मानकों को माप लेते हैं। इम्पैक्ट की स्थिति उत्पन्न होने के साथ हेल्मेट फूल जाते हैं और क्रेनियम के लिए कुशन का घेरा बना लेते हैं। सिर तक पहुंचने वाले इम्पैक्ट और रफ्तार कम करने में यह कुशन अधिक कारगर है।

आईआईटी रुड़की के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के तीन छात्रों का कमाल

डिवाइस का विकास आईआईटी रुड़की के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के तीन बी.टेक. विद्यार्थियों-सारंग नागवंशी, मोहित सिद्धा और राजवर्धन सिंह ने मिल कर किया है। इस टीम का मार्गदर्शन आईआईटी रुड़की के मैकेनिकल एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. संजय उपाध्याय ने किया है।

नई तकनीक के बारे में प्रो. संजय उपाध्याय ने बताया, ‘‘प्रोडक्ट के प्रभावीपन और व्यावहारिक उपयोग के मद्देनजर तैयार कांसेप्ट और परीक्षण के सफल परिणाम मिले हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर तैयार करने के लिए हमें अधिक बारीकी से देखना होगा और इंडस्ट्री का सहयोग भी चाहिए। इसलिए हम इसे उपभोक्ता के लिए आसान बनाने पर काम कर रहे हैं। साथ ही, उद्योग जगत से साझेदारी चाहते हैं ताकि प्रोडक्ट किफ़ायती और उपभोक्ताओं के लिए उपयोग में सुविधाजनक हो।

भारत में पहली बार यह हेल्मेट बनने की वजह से बाहर से बहुत मदद मिली-छात्र

इस आविष्कार पर सारंग नागवंशी का कहना है कि इसरो में इंटर्नशिप के दौरान इन्फ्लेटेबल स्पेस एंटीना पर काम करते हुए हमें इन्फ्लेटेबल हेल्मेट बनाने का विचार आया। भारत में पहली बार यह हेल्मेट बनने की वजह से हमें बाहर से बहुत सीमित मदद मिली और हमारे सीखने का स्तर तेजी से ऊपर गया। हमें जो परिणाम मिले वे उत्साहवर्द्धक हैं और हम इस आइडिया को जमीनी सच बनाने में जी-जान से जुटे हैं।

परीक्षण की मानक स्थिति में हेल्मेट पर चोट संबंधी परीक्षण किए

आईआईटी रुड़की की टीम ने गणित के माडलों पर परीक्षण की मानक स्थिति में हेल्मेट पर चोट संबंधी परीक्षण किए। परिणाम बताते हैं कि इन्फ्लेटेबल हेल्मेट टक्कर के बाद वाहन के पीक एक्सलरेशन कई गुना कम करने में कामयाब हैं। टक्कर की चोट से ‘डमी हेड’ पर लगने वाला फोर्स चार गुना कम होता है और आम हेल्मेट की तुलना मंे यह बहुत कम होता है। इन्फ्लेटेबल एयरबैग हेल्मेट से सिर के जख़्मी होने का खतरा बहुत कम हो जाता है।

आईआईटी रुड़की उच्चतकनी की शिक्षा, इंजीनियरिंग, बेसिक और अप्लाईड रिसर्च में अग्रणी राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में से एक है। इसकी स्थापना से, संस्थान ने तकनीकी श्रमशक्ति प्रदान करने और देश को ज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्थान दुनिया में सबसे अच्छे तकनीकी संस्थानों में शुमार है और इसने तकनीकी विकास के सभी क्षेत्रों में योगदान दिया है। इसे विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग के क्षेत्र, शिक्षा और शोध में ट्रेंडसेट करने वाला भी माना जाता है। संस्थान ने अक्टूबर, 1996 में अपने सेसक्विशेंशियल मनाया था और अब अपने अस्तित्व के 170 से अधिक वर्ष पूरे कर लियेहैं। इसे 21 सितंबर, 2001 को भारत सरकार के अध्यादेश से आईआईटी में परिवर्तित किया गया था। इसे देश के सातवें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय महत्व की संस्था, घोषित किया गया था.



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