• -माननीयों के घरों में भी मयस्सर नहीं है शुद्ध पेयजल
  • -स्पेक्स ने 65 वार्डों से लिये पानी के 96 नमूने, दो ही मानकों पर खरे उतरे 
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून । स्पेक्स ने जन-जन को शुद्ध जन अभियान के तहत राजधानी देहरादून के 65 वार्डों से 96 पेयजल के नमूने एकत्र किये, जिनमें 2 नमूने ही पेयजल मानकों पर खरे उतरे। इस अभियान में ग्रास रूट अवरनेस एण्ड टेक्नीकल इंस्टीट्यूट व जाॅय संस्था ने सहयोग किया। स्पेक्स आमजन के साथ-साथ माननीयों के घरों के नमूने भी एकत्र किये गये, वहां भी शुद्ध पेयजल नहीं पाई गई। 
पत्रकारों से बातचीत करते हुए संस्था के सचिव डा. बृजमोहन शर्मा ने कहा कि विधायक खजानदास के यहाँ टीडीएस 426 एमजीआई, मंत्री सुबोध उनियाल के यहां टीडीएस 430 एमजीआई, सांसद महारानी माला राज लक्ष्मी के यहाँ टीडीएस 432 एमजीआई, विधायक हरबंस कपूर के यहाँ टीडीएस 460 एमजीआई व विनोद चमोली  के यहाँ टीडीएस 416 एमजीआई पाया गया जबकि यह मान टीडीएस 300 एमजीआई से अधिक नहीं होना चाहिये। उनका कहना है कि माननीयों के यहाँ अवशेषित क्लोरीन की मात्रा भी बहुत अधिक पायी गयी जबकि मानक 0.2 एमजीआई से ज्यादा नहीं होनी चाहिये। खजानदास 0.8एमजीआई, सुबोध उनियाल  1.2 एमजीआई, सुनील गामा 1.2 एमजीआई, प्रकाश पन्त 0.8एमजीआई,डा. इन्दिरा हृदयेश 1.4 एमजीआई, महारानी मालाराज लक्ष्मी शाह के यहां 1.0 एमजीआई व विनोद चमोली के यहां 0.8 एमजीआइ पायी गई।
उनका कहना है कि अवशोषित क्लोरीन केवल नई बिंदाल बस्ती व चन्दरनगर में क्लोरीन 0.2 एमजीआई,स मानकों के अनूरूप पायी गई।  32 स्थानों पर क्लोरीन नहीं पायी गयी। उनका कहना है कि शांति विहार, रायपुर चैक, विकाश पुरम्, आमवाला, कल्पना विहार, सपेरा बस्ती, रामनगर, लाड़पुर, तपोवन मार्ग, ईश्वर विहारस, सुन्दरवाला, डाॅंग लाडपुर, बंजारावाला, करनपुर, गुरूद्वारा रोड़, डी.एल.रोड़, आर्यनगर, अम्बेडकर काॅलोनी, इंद्रा काॅलोनी, नव विहार, चुक्खुवाला, धाराचैकी, सी.एन.आई.काॅलेज, राजपुर रोड़, छबीलबाग, आजाद काॅलोनी, दुर्गा विहार, परम्हंस काॅलोनी, पटेलनगर, राजपुर, किशनपुर, जाखन, कंडोली लेन, चूडोवाली गांव, गुजराड़ा, प्रीतम रोड़, नई बस्ती, कालिन्दी एन्क्लेव, कुल्हान, राजेश रावत काॅलोनी, राजेश्वरनगर व त्यागी रोड़ शामिल है। उनका कहना है कि क्लोरीन मानकों से दो गुने से लेकर 7 गुने तक अधिक पाया गया जो कि मानवों के लिए घातक है, जिनमें रामपुर मंडी, चकराता रोड़, घौरण, डाण्डा लखौंड, कालीदास रोड़, अहीर मंडी, डोभालवाला, सिरमौर रोड़, बल्लूपुर रोड़, कृष्णनगर, शिवाजी मार्ग, परसोली वाला, कैंट रोड़, कांग्रेस भवन, सालावाला, के.सी.पब्लिक स्कूल, राजेन्द्र नगर, चुक्खूवाला, ओमकार रोड़, बकराल वाला, रामनगर, लक्खीबाग, कंडौली, विजय काॅलोनी, डांडा, खुदानेवाला, संजय काॅलोनी, डालनवाला, पथरियापीर, वनस्थली, शिव काॅलोनी, खुडबुड़ा मौहल्ला, शांति विहार, गोविन्दगढ़, राजीव काॅलोनी, रामपुरम काॅलोनी, कैंट रोड़, आकाशदीप काॅलोनी, तिलक रोड़, उद्दीवाला, कैनाल रोड़, नरेन्द्र विहार, टैगोर काॅलोनी, चुक्खूवाला, तिलक रोड़, खुडबुड़ा, झण्डा बाजार, लक्खीबाग, भण्डारी बाग, बाॅडीगाड, देहराखास एवं अकेता अवेन्यू शामिल है।
उनका कहना है कि अधिक क्लोरीन से मनुष्यों में अस्थमा, ब्लड़ कैंसर, शरीर की कोशिकाओं को नुकसान, नाक-कान व आँख के रोग, छाती की जकड़न, गला सूखना, हृदय रोग, बाल झड़ना, त्वचा जल्दी बूढ़ी होना आदि रोगों से ग्रसित हो सकते है।
उनका कहना है कि टोटल डिजोल्व सोलिड का प्रतिशत मानक 300 एमजीआई एवं स्वास्थ्य के लिये 180 एमजीआई,सबसे उपयुक्त है। 8 स्थानों पर टीडीएस पेयजल के लिए उपयुक्त पाया गया विजय काॅलोनी 226, डांडा खुदानेवाला 249, धौरण डांडा 225, कल्पना विहार 294, ईश्वर विहार 233, सुन्दर वाला 234, लाडपुर 233। अन्य स्थनों पर इन्द्रा काॅलोनी 389, नव विहार काॅलोनी 399, धाराचैकी 389, सालावाला 321, नई बिंदाल बस्ती 336, परमहंस काॅलोनी 358, टेगौर काॅलोनी 381, चुक्खूवाला 382, तिलक रोड़ 375, ओमकार रोड़ 399, बकरार वाला 381, डोभालवाला 367, अहीर मंडी 360, कालीदास रोड़ 365, पथरियापीर 396, कंडौली 343, कंडौली लेन 330, कुल्हान 398, आमवाला 388, विकासपुरम 324, संपेरा बस्ती 310, रामनगर काॅलोनी 338, संजय काॅलोनी 368, प्रीतम रोड़ 325, नई बस्ती 377, राजेश रावत काॅलोनी 391, रामपुर मंडी 426, चकराता रोड़ 426, कांग्रेस भवन 407, वरसोलीवाला कैंट रोड़ 414, 462, आजाद काॅलोनी 408, किशन नगर चैक 438, बल्लूपुर रोड़ 493, वसंत विहार 492, दुर्गा विहार 495, अधोईवाला 491, राजेन्द्र नगर 432, नरेन्द्र विहार 468, सिरमौर रोड़ 429, चुक्खूवाला 403, खुडबुड़ा 431, भंडारीबाग489, देहराखास 531, पटेलनगर 484, पेटलनगर 463, जाखन 397, शांति विहार रायपुर चैक 408, अपर अधोईवाला 439, राजेश्वर नगर 463, तपोवन मार्ग 479, त्यागी रोड़ 443, चन्दर नगर 492, डालनवाला 426, झंडा बाजार 518, रामनगर 512, लक्खीबाग 512, बाॅडीगाड 528, करनपुर 558, एकेता एव्येन्यू 713, राजपुर 622 और किशनपुर 657 है।
उनका कहना है कि टीडीएस अधिक होने का देहरादून के परिपेक्ष्य में कठोरता अधिक होना है। यह त्वचा में झुर्रियां बढ़ाता है, विश्व स्वास्थ्य  संगठन के अध्यन्न से पता चला है कि हृदय रोगियों में कठोर जल भी एक कारण है। ताईवान की एक स्ट्डी से पता चलतरा है कि कठोर जल कैंसर का कारण भी हो सकता है। कठोर जल के कारण रक्तचाप बढ़ना, भूख कम लगना, एसीडिटी, पथरी, मधुमेह तथा एल्जाइमर जैसे रोग भी हो सकते हैं।टोटल काॅलीफार्म,  देहरादून पेयजल में 37 स्थानों पर टोटल कालीफार्म पया गया। जिसमें सबसे अधिक सपेरा बस्ती, 108 म.प.न./100मिली. तथा राजपुर रोड़ पर सबसे कम 4 म.प.न./100मिली. पाया गया, बाकी 35 स्थानों पर टोटल कालीफार्म  सपेरा बस्ती 108, परमहंस काॅलोनी 104, चूड़ोवाली 82, दुर्गा विहार 78, नई बस्ती 72, कंडौली लेन 64, छबीलबाग 52, रामनगर 48, डी.एल.रोड़ 48, कल्पना विहार 44, आम वाला 42, आर्यनगर 42, लाडपुर 38, पटेलनगर 38, बंजारावाला 32, डी.एल.रोड़ 32, डी.एल.रोड़ 32, सुन्दरवाला 30, नव विहार 28, विकासपुरम 28, करनपुर 26, गुजराड़ा 26, इंदरा काॅलोनी 26, जाखन 24, कालिंदी एन्कलेव 24, आजाद काॅलोनी 22, प्रीतम रोड 18, राजपुर 16, शांति विहार 14, धाराचैकी 12, कुल्हान 12, गुजराड़ा 12, त्यागी रोड़ 12, तपोवन मार्ग 12, ईश्वर विहार 10, कुल्हान 10, नई बिंदाल बस्ती 10, चन्दर नगर 08, सी.एन.आई. काॅलेव व राजपुर रोड़ 4 पाया गया। 
उनका कहना है कि फीकल कालीफार्म: देहरादून के पेयजल में फीकल कालीफार्म 37 स्थानों पर पाया गया जिसमें सबसे अधिक सपेरा बस्ती 62 म.प.न./100 मिली. तथा सबसे कम धारा चैकी, कृषाली, कुल्हान, नई बिंदाल बस्ती, चन्दर नगर, 2 म.प.न./100 मिली. पाया गया। शेष 35 स्थानों पर फीकल कालीफार्म है जिनमें नई बस्ती 34, चीडौवाली गांव 32, कंडौली लेन 28, रामनगर काॅलोनी 26, परमहंस काॅलोनी 28, छबीलबाग 24, आमवाला 22, विकासपुरम 20, आर्यनगर 20, पटेल नगर 18, डी.एल.रोडत्र 18, सुंदरवाला 18, बंजारावाला 18, पटेलनगर 16, इंदिरा काॅलोनी 12, आजाद काॅलोनी 12, जाखन 10, दुर्गा विहार 12, लाडपुर 12, कल्पना विहार 12, करनपुर 12, गुरूद्वारा रोड़ 10, डी.एल.रोड़ 10, नव विहार 8, तपोवन मार्ग 8, कालिंदी एन्कलेव 8, राजपुर 8, शांति विहार 4, त्यागी रोड़ 4, ईश्वर विहार व प्रीतम रोड़ 4 शामिल है। उनका कहना है कि कालीफार्म के दुःस्प्रभाव से पेट के  रोग, डायरिया, कान व नाक के इंफेक्सन, गैस्ट्रो, फ्लुलाईन, पेट के कीड़े, हैपोटाइटिस, पीलिया आदि रोग होने की सम्भावना होती है। इस अवसर पर जाॅय संस्था के पदाधिकारी व सदस्य भी मौजूद थे।



https://ift.tt/2y1ylcl


See More

 
Top