नागालैंड के वोखा जिले में स्थित एक बांध से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद असम के गोलाघाट जिले के 116 गावों के हजारों लोग बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं. इस बांध को उत्तर पूर्व इलेक्ट्रिक पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड (नीपको) द्वारा संचालित किया जाता है.

अधिकारियों ने कहा कि बीते सप्ताह पांच जिलों गोलाघाट, शिवसागर, धेमाजी, लखीमपुर व दरांग के 1,04,205 लोगों को प्रभावित करने के बाद यह बाढ़ की दूसरी लहर है. गोलाघाट के 116 गांवों में 93,000 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं.

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अधिकारियों ने कहा कि बाढ़ से 7,424 हेक्टेयर की कृषि भूमि भी प्रभावित हुई है और 26,000 से अधिक लोगों ने राज्य सरकार द्वारा खोले गए 123 राहत शिविरों में आश्रय लिया है. धान के खेतों के बड़े हिस्से भी गाद की चपेट में आए हैं, जिससे किसान प्रभावित हुए हैं.

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू), कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) और असम जातीयबादी युवा छात्र परिषद (एजेवाईसीपी) सहित विभिन्न संगठनों ने बिना गांव वालों को सूचित किए पानी छोड़ने को लेकर नीपको की आलोचना की है. उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की मांग की है.

केएमएसएस के नेता अखिल गोगोई ने सोमवार को कहा, “नीपको ने न सिर्फ अपने जलाशयों से पानी छोड़ा है, बल्कि गाद भी छोड़ा है जिससे धान के खेत व 116 प्रभावित गांवों के ग्रामीणों के घर भी डूबे हुए हैं. किसानों ने अपनी आजीविका खो दी है, क्योंकि गाद धान के खेतों में भर गई है. घर व मवेशी बह गए हैं.”

नीपको ने सोमवार को स्पष्ट किया कि लगातार बारिश होने की वजह से ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में जलाशय का जल स्तर 25 जुलाई से अचानक से तेजी से बढ़ना शुरू हो गया था.

नीपको द्वारा सोमवार को जारी एक बयान में कहा, “31 जुलाई को अचानक से जलस्तर बढ़ने से अतिरिक्त पानी को छोड़ने की जरूरत पड़ी.”

नीपको अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने गोलाघाट जिला प्रशासनन के साथ जानकारी साझा की थी.

असम में जून से दो बाढ़ की लहरों से 10 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. एएसडीएमए के अनुसार, अब तक बाढ़ से राज्य के विभिन्न हिस्सों में 42 लोगों की मौत हो चुकी है.





See More

 
Top