सोमवार को एसआईटी अदालत ने 2002 गोधरा कांड में सुनवाई करते हुए दो आरोपियों को दोषी करार दिया है और तीन लोगों को बरी कर दिया हैं.

बता दें कि 27 फ़रवरी 2002 को गुजरात में स्थित गोधरा शहर में एक रेलगाड़ी में आग लगने से 59 यात्री की मौत हो गई थी. जिनमें अधिकांश लोग हिन्दू बिरादरी से थे. इस घटना का इलज़ाम मुख्य रूप से मुस्लमानों पर लगाया गया था. जिसके नतीजा में गुजरात में 2002 के दंगे हुए.

2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने गोधरा स्टेशन पर वर्ष 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगाकर 59 लोगों की जान लेने के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी करार दिए जा चुके 11 लोगों की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में तब्दील कर दी था.

जबकि 20 दोषियों को उम्रकैद तथा 63 आरोपियों को बरी करने के फैसले को नहीं पलटा था. विशेष अदालत ने इस मामले में कुल 94 में से 63 आरोपियों को बरी कर दिया था, और कुल 31 आरोपियों को दोषी करार देकर उनमें से 11 को फांसी तथा 20 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी.





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