सरकार में आने के बाद जिस पारदर्शिता का दावा बीजेपी संगठन ने किया था अब वो वादा बीजेपी भूल चुकी है। सरकार बनने से पहले और सरकार बनने के बाद भी बीजेपी के प्रदेश संगठन ने और यहां तक कि सरकार ने भी वादा किया था कि सरकार में शामिल मंत्रियों की आय का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाएगा।

वहीं संगठन ने भी बीजेपी के विधायकों की आय को जल्द सार्वजनिक करने की हामी भरी थी। हैरानी इस बात की है कि सरकार को बने डेढ़ साल का वक्त हो गया है लेकिन अब तक न तो सरकार में शामिल मंत्रियों ने और न ही बीजेपी के विधायकों ने अपनी आय का आंकड़ा जनता के सामने सार्वजनिक किया है।

दरअसल विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने जोर शोर से कांग्रेस से उसके नेताओं की आय का विवरण मांगा। यहां तक कि तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत पर बेनामी संपत्ति इकट्ठा करने का आरोप भी लगा। हरीश रावत ने इस आरोप के जवाब में विपक्षियों को संपत्ति की अदला बदली का ऑफर भी दिया। यही नहीं हरीश रावत ने अपने घर को मीडिया तक के लिए खोल दिया ताकि जनता को पता चले कि वो कैसे रहते हैं।

इसके बाद जीरो टालरेंस का दावा करने वाली त्रिवेंद्र सरकार सत्ता में आई। सबको लगा कि अब नेताओं की संपत्ति का विवरण आम जनता को मिल सकेगा। लेकिन हैरानी देखिए कि न तो सरकार के मंत्रियों ने जनता के साथ अपनी आय साझा की और न ही संगठन में बैठे पदाधिकारियों ने। हाल ही में राज्य में तैनात IAS अफसरों और IPS अफसरों की संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी गई थी लेकिन नहीं मिल पाई।

ऐसे में अब बीजेपी की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा होने लगा है। क्या बीजेपी का कांग्रेस नेताओं की संपत्ति का विवरण मांगना और अपने नेताओं, मंत्रियों की संपत्ति का विवरण देने का वादा महज चुनावी जुमला था। हालात तो ये हैं कि खुद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी अपनी संपत्ति का विवरण जनता के सामने नहीं रखा है। ऐसे में अब ये देखना होगा कि बीजेपी का कौन सा नेता अपनी संपत्ति की विवरण सार्वजनिक कर अपनी ही पार्टी के लिए उदाहरण बनता है।





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