राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा सोमवार को अपने उस बयान से पलट गए, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘यदुवंशियों का दूध और कुशवंशियों का चावल मिल जाए तो खीर बढ़िया बन सकती है’.

कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने न तो राजद से दूध मांगा है और न ही भाजपा से चीनी मांगी है. कुशवाहा ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया. उन्होंने तो सभी समाज का समर्थन मांगा था.

उन्होंने कहा, “मैंने न राजद से दूध मांगा और न ही भाजपा से चीनी मांगी. हमने सभी समाज से समर्थन मांगा है. मैं तो सामाजिक एकता की बात कर रहा था. किसी जाति या समुदाय को किसी राजनीतिक पार्टी से जोड़ने की कोशिश न करें.”

उल्लेखनीय है कि पटना में एक दिन पूर्व एक कार्यक्रम में यादव और कुशवाहा समाज के लोगों को साथ आने की वकालत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि यदुवंशियों का दूध और कुशवंशियों का चावल मिल जाए तो खीर बढ़िया बन सकती है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि खीर बनाने के लिए दूध और चावल ही नहीं, बल्कि छोटी जाति और दबे-कुचले समाज के लोगों का पंचमेवा भी चाहिए.

इस बयान के बाद समझा जाने लगा था कि कुशवाहा अब राजद गठबंधन में जाने वाले हैं, जिसे लेकर बिहार की राजनीति गर्म हो गई.राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए कुशवाहा के बयान का समर्थन कर दिया.

तेजस्वी ने एक ट्वीट में कहा, “नि:संदेह उपेंद्र जी, स्वादिष्ट और पौष्टिक खीर श्रमशील लोगों की जरूरत है.पंचमेवा के स्वास्थ्यवर्धक गुण न केवल शरीर, बल्कि स्वस्थ समतामूलक समाज के निर्माण में भी ऊर्जा देते हैं.प्रेमभाव से बनाई गई खीर में पौष्टिकता, स्वाद और ऊर्जा की भरपूर मात्रा होती है. यह एक अच्छा व्यंजन है.”

वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है जब कुशवाहा को राजद के नजदीकी होने के कयास लगाए जा रहे हैं. इससे पहले भी कई ऐसे मौकों पर कुशवाहा, लालू प्रसाद के साथ नजदीकी होने के संकेत देते रहे हैं.

इधर, राजद उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी सोमवार को कहा कि बहुत जल्द ही रालोसपा महागठबंधन में शामिल होगी. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह भी बहुत जल्द महागठबंधन में आने वाले हैं





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