भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक और नोबेल पुरस्कार विजेता विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल का 85 वर्ष की आयु में लंदन स्थित उनके घर में निधन हो गया. नायपॉल की पत्नी ने उनके निधन की पुष्टि कर कहा कि उनका निधन शनिवार को लंदन में हुआ.

उन्होंने जारी बयान में कहा, “उन्होंने जो कुछ हासिल किया था वह बहुत बड़ा था और वह अपने आखिरी वक्त में उन लोगों के साथ थे, जिनसे वह प्यार करते थे. उन्होंने रचनात्मकता और उद्यमिता से भरी जिंदगी जी.”

समाचार एजेंसी ‘एफे’ की रिपोर्ट के अनुसार, 2001 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार के अलावा वी.एस नायपॉल ने वर्ष 1971 में बुकर पुरस्कार भी जीता था. नायपॉल को 20वीं और 21वीं शताब्दी में अंग्रेजी भाषा के सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में से एक माना जाता था.

उनका जन्म भारतीय प्रवासी परिवार में त्रिनिडाड और टोबैगो द्वीप चगुआनास में हुआ था. वहां से वह ब्रिटेन स्थानांतरित हुए और वर्ष 1950 में सरकारी छात्रवृत्ति जीतने के बाद ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिल हुए.

उन्होंने वर्ष 1961 में अपना साहित्यिक करियर शुरू किया और तब से उन्होंने लगभग 30 किताबें लिखी. उन्हें हालांकि ‘ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास’ उपन्यास ने काफी प्रसिद्धि दिलाई.

उनकी प्रमुख कृतियों में ‘द एनिगमा ऑफ अराइवल’, ‘मिगुएल स्ट्रीट’, ‘द लॉस ऑफ एल डोराडो’ और ‘बियॉंड बिलीफ : इस्लामिक एक्सकर्सन्स अमंग द कंवर्टेड पीपुल्स’ शामिल थीं.

नायपॉल के निधन पर कई लोगों ने दुख जताया जिनमें लंदन के ‘द मेल’ के संपादक व नायपॉल के करीबी मित्र जियॉर्डी ग्रेग ने कहा, “ब्रिटेन की साहित्यिक विरासत को बड़ा नुकसान लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनकी किताबें ताउम्र रहेंगी.”





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