हाईकोर्टदेहरादून: नैनीताल हाईकोर्ट ने देहरादून के प्रेमनगर थाने में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म मामले की प्राथमिकी को निरस्त कर दिया है। पीड़िता की ओर से कोर्ट में उपस्थित होकर कहा कि एक पार्टी में कहासुनी होने की वजह से उसने ऐसा मुकदमा दर्ज कराया था।

गौर हो कि  12 जून 2018 को कोलकत्ता की युवती ने थाना प्रेमनगर में शिकायत दर्ज कराई थी। बताया कि वह दिल्ली से देहरादून अपनी सहेली के घर आई थी। 11 जून की रात को भानू नाम का युवक उसे प्रेमनगर ले गया और वहां एक मकान में छोड़ दिया। जिसके बाद वहां मौजूद चार लोगों जितेंद्र तनेजा, अजय अरोड़ा, सुमित और एक अन्य जिसकी पहचान बाद में सागर चांदना के रूप में पुलिस ने की थी, ने उसे नशीला पेय पिलाकर उसे बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। शिकायत पर प्रेमनगर पुलिस ने तत्काल दो आरोपियों सुमित और युवती को प्रेमनगर पहुंचाने वाले युवक भानू को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि अन्य आरोपित फरार हो गए थे। घटना के दो दिन बाद दो लोग हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले आए थे। इसी हफ्ते पुलिस ने मामले में पांचो आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

लेकिन, आरोपितों ने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। डिप्टी एडवोकेट जनरल संदीप टंडन ने बताया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। पीड़िता खुद कोर्ट में मौजूद रही और हलफनामा दिया। न्यायाधीश न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद प्राथमिकी निरस्त करने का आदेश पारित किया है। वहीं एसएसपी और प्रेमनगर पुलिस ने इस संबंध में किसी भी प्रकार के आदेश आने से इन्कार किया है।





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