• राजाजी पार्क में बरामद बाघ और तेंदुओं की खालों का मामला 
  • पार्क अधिकारियों ने संदूक के अलावा सब कुछ बदल डाला : जांच रिपोर्ट 
  • चर्चित अधिकारी है शासन में बैठे एक अधिकारी के नाक का बाल!

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

DEHRADUN : राजाजी टाइगर रिज़र्व में बाघ की बरामद खालों की जगह सील्ड बॉक्स में अन्य खालें बरामद होने के बाद जांच अधिकारी मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन ने सवाल खड़े किये हैं। उन्होंने प्रमुख वन संरक्षक को जो रिपोर्ट भेजी है वह काफी चौंकाने वाली तो है ही साथ ही सवाल भी खड़े करती है कि आखिर वन अधिकारियों को इस तरह खाल और सील्ड बॉक्स के ताले तक बदलने की जरुरत क्यों पड़ीं।इससे साफ़जाहिर है कि मामले में कहीं न कहीं कुछ बड़ा मामला और कोई बड़े अधिकारी का हाथ संभव है। मामले में प्रमुख वन संरक्षक ने राजाजी टाइगर रिज़र्व के निदेशक सहित चर्चित जांच अधिकारी कोमल सिंह और अन्य से स्पष्टीकरण माँगा है। 

गौरतलब हो कि 22 मार्च 2018 को राजाजी टाइगर रिज़र्व से बाढ़ और तेंदुओं की खाल सहित कुछ हड्डियां बरामद हुई थी। जिन्हे राजाजी टाइगर रिज़र्व के निदेशक सनातन की उपस्थिति में एक बॉक्स में दिनांक 22 मार्च को सायं सील किया गया था और जांच के लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान की प्रयोगशाला में भेजा गया था। बाघ और तेंदुओं की खाल की बरामदगी को लेकर चर्चा में आये कोमल सिंह को इस जांच से हटाते हुए शासन ने मामले की जांच मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन को मामले की जांच सौंप दी थी। मनोज चन्द्रन को जांच सौंपे जाने के बाद यह साफ़ था कि वे जांच में दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे ,और हुआ भी यही उन्होंने जिस तरह से जांच की है उससे कई अधिकारी और कर्मचारी बेनकाब हो गए हैं। उनकी जांच में कहा गया है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान काफी जुदा हैं जबकि जब उनके सामने खालों और हड्डियों से भरा बॉक्स जब सील हुआ था तो उस वक्त के बयान तो एक होने चाहिए थे लेकिन बयान में किसी ने कहा मेरे सामने बॉक्स सील किया गया तो किसी ने कहा मेरे सामने सील नहीं हुआ जबकि सील करते वक़्त सबको साथ दिखाया गया है। 

इतना ही नहीं प्रमुख वन संरक्षक को भेजे पत्र में उन्होंने साफ़ कहा है कि जो सील्ड बॉक्स के भीतर की खालें बदलने के अलावा जो रिपोर्ट उस वक्त बनाई गयी थी और जो रिपोर्ट वन्य जीव संस्थान को भेजी  गयी है उसमें भी काफी अंतर पाया गया है। इतना ही नहीं जिन छह पैकेट्स में जानवरों की जो खालें थी वे भी बदली गयी और बॉक्स के ताले तक बदले गए थे। वहीँ  मौके पर जब्त टोपी, बोतल आदि सामग्री भी नहीं मिली। इतना ही नहीं सील्ड करते वक़्त जिन बड़े तालों पर जिस मुहर का इस्तेमाल किया गया था बॉक्स खोलते समय सील बॉक्स के छोटे ताले और उसपर सील्ड करते वक़्त की मुहर में काफी विरोधाभास पाया गया।  जो साफ़ इंगित करता है कि बॉक्स को मोतीचूर कार्यालय से देहरादून वन्यजीव प्रयोगशाला तक पहुँचने के बीच बॉक्स को छोड़ बाकी सबकुछ बदल दिया गया।  यानि मामले में कहीं न कहीं वन्य जीव अधिकारियों की मिलीभगत है और उन्होंने मामला खुलने की डर से बॉक्स के अलावा सब कुछ बदल डाला। 

मामले में गहरी साजिश का पर्दाफ़ाश करते हुए जांच अधिकारी मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन ने जहाँ वहां तैनात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की संस्तुति की है वहीँ प्रमुख वन संरक्षक ने 16 अगस्त तक राजाजी टाइगर रिज़र्व के निदेशक सनातन सहित चर्चित जांच अधिकारी कोमल सिंह सहित मामले में शामिल अन्य कर्मचारियों से स्पष्टीकरण माँगा है।  यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि मामले में चर्चा है कि चर्चित कोमल सिंह  पर एक अपर मुख्य सचिव रैंक के अधिकारी का वरदहस्त बताया जा रहा है जो इस अधिकारी के नाक के बाल के रूप में माना जाता रहा है। 

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