• शुल्क नियामक समिति और अपीलीय प्राधिकरण का गठन हो शीघ्र 
देहरादून । निजी मेडिकल विश्वविद्यालय संयुक्त अभिवावक संघ ने एमबीबीएस की फीस बढ़ोतरी का विरोध किया है। संघ के मुख्य संरक्षक रविन्द्र जुगरान ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ने पहले प्रत्यक्ष रूप से और अब अप्रत्यक्ष रूप से एमबीबीएस की फीस को 250 प्रतिशत से 300 प्रतिशत तक बढा दी। उन्होंने कहा कि शुल्क नियामक समिति और अपीलीय प्राधिकरण का राज्य सरकार द्वारा विधिवत गठन किया जाय व राज्य शुल्क नियामक समिति में अभिभावक संघ के एक प्रतिनिधि को नामित किया जाये।
पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को राज्य कोटे से चार लाख प्रतिवर्ष देने होते थे अब वह दस लाख प्रति वर्ष फीस भरेगें इसी प्रकार आॅल इण्डिया कोटे के विद्यार्थियों को जिनको पांच लाख प्रति वर्ष शुल्क देना था वह अब पन्द्रह लाख रू प्रतिवर्ष देगें। उन्होने कहा कि शुल्क में 300 प्रतिशत की वृद्वि उत्राखण्ड राज्य में ही संभव है क्योकि उत्तराखण्ड सरकार में शासन नाम की कोई व्यवस्था ही नही है।
उन्होने कहा कि हमारी मांग है कि राज्य सरकार तत्काल गैर कानूनी एवं असंवैधानिक रूप से की गई शुल्क वृद्वि को वापस ले, शुल्क नियामक समिति और अपीलीय प्राधिकरण का राज्य सरकार द्वारा विधिवत गठन किया जाय व राज्य शुल्क नियामक समिति में अभिभावक संघ के एक प्रतिनिधि को नामित किया जाये। वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों से शुल्क वृद्वि का राज्य सरकार और न ही विश्वविद्यालय किसी प्रकार से मानसिक शोषण कर दबाव न डाले अगर किसी विद्यार्थी का मानसिक सन्तुलन खराब होता है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार तथा विश्वविद्यालय की होगी।
प्रेस वार्ता के दौरान संघ के जगदीश प्रसाद अंथवाल, नेत्र सिंह चैहान, धनजय विडला, उमा पाटनी, रमेश चंद्र डबराल, विरेन्द्र सिंह, विनोद भट्ट, नरेन्द्र शर्मा एडवोकेट, मुकेश नौटियाल, पीपी यादव आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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