देहरादून । वन गुजरों की वन्यजीवों की तस्करी के कई मामले प्रकाश में आने के बाद अब वन विभाग पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। उत्तराखण्ड के राज्य में रूप में अस्तित्व में आने के बाद जंगलों से वन गुर्जरों को हटाने की कवायद शुरू हो गयी थी। किन्तु आज तक इस मामले को निपटाया नहीं जा सका था। अब वन विभाग इस मामले की लेकर काफी संजीदा नजर आ रहा है। कॉर्बेट नेशनल पार्क से वन गुर्जरों को विस्थापित करने की कवायद तेज हो गई है।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पार्क प्रशासन ने इन्हें पार्क से हटाने का मन बना लिया है। जल्द ही पार्क गुर्जरों से मुक्त हो जाएगा। कॉर्बेट पार्क के ढेला और झिरना रेंज में गुर्जरों के 57 परिवार निवास करते हैं। इन्हें अब शिफ्ट करने की बात चल रही है। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद यह कदम उठाया जा रहा है. इन लोगों के लिए पार्क प्रशासन ने दो विकल्प दिये हैं। पहले विकल्प के तहत इनमें से प्रत्येक परिवार को 10-10 लाख रुपये दिये जाएंगे। यदि उन्हें यह विकल्प पसंद नहीं आता है तो उनके लिये दूसरे विकल्प के तौर पर तराई-पश्चिमी वन प्रभाग में जमीन मुहैया कराई जाएगी।
उधर कॉर्बट प्रशासन का यह विकल्प गुर्जरों को भी भा रहा है। वन गुर्जरों की यदि माने तो उन्हें जमीन देकर यहां से शिफ्ट किया जाता है तो वे इसका स्वागत करेंगे। वे खुद भी यहां से शिफ्ट होना चाहते हैं। यहां वे पीढ़ियों से कई परेशानियों का सामना कर रहने को मजबूर रहे हैं। गुर्जरों का विस्थापन जहां एक ओर बाघों की सुरक्षा के लिए अनुकूल रहेगा वहीं जंगलों में जीवन गुजार रहे इन वन गुर्जरों को भी जंगल के बाहर हो रहे विकास कार्यों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का मौका देगा।

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