• सलाखों के पीछे होते सफेदपोश यदि होती सीबीआई जांच  : बेहड़
  • केंद्र सरकार के मंत्री का एनएचएआई के अफसरों को मिल रहा संरक्षण
  •  पार्टी बदल कर संरक्षण हासिल करने वालों के खिलाफ करें मुख्यमंत्री करें कार्रवाई

DEHRADUN  : एनएच-74 मुआवजा घोटाले में जमीन का लैंड यूज बैक डेट में बदलवाकर 30 करोड़ मुआवजा हड़पने वाले जसपुर के पांच किसान विदेश भाग गए हैं। एसआईटी को उनके कनाडा भागने का अंदेशा है। जांच में पुष्टि होने पर एसआईटी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की तैयारी में है। इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के साथ सीआरपीसी की धारा 82 और 83 के तहत कुर्की के लिए भी आवेदन किया जाएगा।

एसआईटी को काशीपुर और जसपुर तहसील की जांच के दौरान पता चला था कि किसानों ने अफसरों की मिलीभगत से बैक डेट में करोड़ों रुपये का मुआवजा बटोरा। एसआईटी ने जसपुर और काशीपुर तहसील के ऐसे आठ काश्तकार चिह्नित किए थे। एसआईटी अफसरों के मुताबिक जसपुर तहसील के पांच किसानों दलविंदर सिंह, बलजीत कौर, दिलबाग सिंह, विक्रम सिंह और मनदीप सिंह ने कृषि भूमि को बैक डेट में 143 कराकर अकृषि के तहत  करीब तीस करोड़ रुपये मुआवजा ले लिया।

पुलिस ने इनकी धरपकड़ के लिए दबिश दी, लेकिन वे गिरफ्त में नहीं आ सके। पुलिस को सूचना मिली है कि आरोपी किसान कनाडा भाग गए हैं। फिलहाल पुलिस इसकी पुष्टि करने में जुटी है। एसआईटी के विवेचक स्वतंत्र कुमार के आवेदन पर नैनीताल स्थित भ्रष्टाचार निवारण विशेष अदालत ने बीते चार जनवरी को आठ किसानों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी कर दिया था। इसकी जानकारी मिलते ही वे फरार हो गए।

इधर ऊधमसिंह नगर के एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि फरार किसानों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की तैयारी है। घोटाले में तीसरी चार्जशीट के साथ किसानों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस कराया जाएगा। 

वहीँ दूसरी तरफ रुद्रपुरसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ ने एक बयान में कहा कि जिस तरह से परत दर परत एनएच 74 घोटाले का खुलासा हो रहा है, उसमें राज्य के अधिकारियों व सफेदपोशों की भूमिका तो उजागर हो ही रही है वहीं इस घोटालें में एनएचएआई के अधिकारियों की संलिप्ता भी सामने आई है, मगर एनएचएआई के अधिकारियों को भारत सरकार के एक केबिनेट मंत्री का संरक्षण है, जिसके चलते उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

श्री बेहड़ ने कहा कि वह इसीलिए चाहते थे कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को उन्होंने सीबीआई जांच के लिए पत्र लिखे तथा धरना प्रदर्शन के जरिए भी इस बड़े घोटाले की सीबीआई जांच की मांग लगातार की जाती रही, लेकिन अब जब एसआईटी की जांच सही दिशा में जा रही है तो उस पर सवाल उठाने का प्रश्न ही नहीं उठता। फिर भी यदि सीबीआई जांच होती तो आज एनएचएआई के अफसर व बड़े बड़े सफेदपोश नेता जिन्होंने उस समय खुलकर अधिकारियों से काम कराने के नाम पर दलाली की, आज वह सलाखों के पीछे होते।

 श्री बेहड़ ने कहा कि अब राज्य सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए। जिन जिन नेताओं ने सरकार की आड़ में पार्टियां बदलकर संरक्षण प्राप्त करने का काम किया है, मुख्यमंत्री को ऐसे सभी लोगों के खिलाफ  तत्काल कार्रवाई के निर्देश देने चाहिए, तभी दूध का दूध ओर पानी का पानी हो सकेगा।

श्री बेहड़ ने कहा कि एनएच 74 के नाम पर नेताओं और अधिकारियों ने खुलकर लूट मचाई है। आज अधिकारियों के खिलाफ  तो कार्यवाही हो रही है, पर संरक्षण देने वाले लोग जिन्होंने करोड़ो रुपये की सम्पत्ति अर्जित की है। नोटबंदी के दौरान ऐसे लोगों ने उन करोडो रुपयों को किस तरह से ठिकाने लगाया है पूरे प्रदेश की जनता अच्छी तरह से जानती है। ऐसे सफेद पोश लोगों के खिलाफ  भी कार्यवाही होनी चाहिये। श्री बेहड़ ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी का वो पत्र जो उन्होंने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को लिखा था कि मामले की सीबीआई जांच न हो आज वो समय नजदीक आ गया है उनके विभाग के कई अधिकारी भी इसमें शामिल हैं। उनके खिलाफ  भी तत्काल कार्यवाही की जाए।

श्री बेहड़ ने कहा कि जो जिला प्रशासन द्वारा आर्विट्रेशन के मामलों का निस्तारण किया गया। जिसमें करोड़ो का घोटाला हुआ है। उन मामलों को लेकर एनएचएआई के अधिकारियों ने अपना पक्ष कोर्ट में नहीं रखा। जिससे साफ जाहिर होता है कि एनएच 74 घोटाले में एनएचएआई के अधिकारी भी शामिल हैं।  

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