• केदारपुरी का पुनर्निर्माण कार्य और भी पकड़ चुका है तेजी 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : जून 2013 में आपदा का दंश झेल चुकी केदारपुरी धीरे-धीरे नए रूप में आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए सारे कार्य और राज्य सरकार की देखरेख में चल रहे तमाम पुनर्निर्माण के कार्य तेज़ी से चल रहे हैं वहीं राज्य सरकार का जोर अभी तीर्थ पुरोहितों के लिए आवास, सरस्वती नदी में घाट और सेंटर प्लाजा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा कराने पर है। प्रदेश सरकार हर हाल में इन कार्यों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले माह संभावित दौरे से पहले पूरा करना चाहती है।

गौरतलब हो कि जहां केदारनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वहीं केदार राज्य सरकार के लिए एक तरह से चुनौती भी बना हुआ है कि कैसे यहाँ चल रहे पुनर्निर्माण के कार्य मोदी के अगले महीने के दौरे से पहले पूर्ण करवा दिए जायं । 2013 में आई जलप्रलय ने मंदिर को छोड़ केदारपुरी को तबाह कर दिया था। तब से ही यहां पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। हालाँकि प्रदेश में काबिज तत्कालीन कांग्रेस सरकार का ध्यान भी केदारपुरी के पुनर्निर्माण का था क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार रहा है। वहीं चुनाव के बाद सूबे में त्रिवेन्द्र रावत के नेतृत्व में भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब केदारपुरी का पुनर्निर्माण कार्य और भी तेजी पकड़ चुका है और अब यहां जमीन पर पुनर्निर्माण कार्य साफ़ दिखाई भी देने लगे हैं।

केदारनाथ हेलीपैड से मंदिर तक लगभग 15 मीटर चौड़ा व 365 मीटर लंबा मार्ग निर्माणाधीन है जो आधा बनकर तैयार भी हो गया है। यह मार्ग सेंट्रल प्लाजा तक पहुंचाता है। सेंट्रल प्लाजा भी लगभग बन कर तैयार हो गया है जिसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है,यहां से सीधे मंदिर के दर्शन हो सकते हैं, जबकि आपदा से पूर्व मंदिर अनेकानेक अतिक्रमण के कारण नजर ही नहीं आता था।

मंदिर के आगे चौड़ी सीढिय़ां भी बन कर तैयार हो चुकी हैं। इस सड़क के दोनों तरफ स्ट्रीट लाइटें लग चुकी हैं। केवल अब साइड में रेलिंग लगनी बाकी हैं। सीढिय़ां समाप्त होते ही लंबा चौड़ा आंगन बन कर तैयार है। इस आंगन में पहुंचते ही मंदिर की दिव्यता व भव्यता के दर्शन होते हैं तो ठीक पीछे हिमाच्छादित पहाड़ियां गाँधी सरोवर और हिमालय के साफ़ दर्शन के लिए तैयार हो चुका है।

मंदिर के पीछे वह दिव्य शिला है जिसे भीम शिला का नाम दिया गया है इसी विशाल शिला ने आपदा के महाजलप्रलय के दौरान मंदिर को बचाया था। हालांकि, अब भी इसके आसपास फैले पत्थरों और मलवे से साफ़ समझा जा सकता है कि आपदा कितनी भयावह और विकराल रही होगी। वर्तमान में मंदिर के दोनों किनारों पर मंदाकिनी और सरस्वती पर पानी को रोकने के लिए रिटेनिंग प्रोटेक्शनवॉल बन रही है जो लगभग पूर्ण होने को है।
वहीं सरस्वती नदी में भी लगभग आधा किलोमीटर हिस्से पर प्रोटेक्शन रिटेनिंग वाल बनाई जा रही है। यहां पर घाट निर्माण का कार्य भी अपने अंतिम चरणों पर है। सरस्वती और मन्दाकिनी नदी के संगम पर स्नान घाट बन कर पूरा हो चुका है। धाम में श्रद्धालुओं के लिए प्रीफैब्रिकेटेड हट, डोरमैट्री, धर्मशालाएं, टेंट आदि में ठहरने की व्यवस्थाएं काफी अच्छी हो चुकी है।

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