• 24 साल बाद भी उत्तराखंड के लोगों को न्याय नहीं मिल पाया
  • गैरसैंण में राजधानी बना कर ही शहीदों के होंगे साकार  

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादन : दो अक्टूबर 1994 को रामपुर तिराहा कांड की 24वीं बरसी पर कचहरी स्थित शहीद स्थल पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के सदस्यों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। वहीं ऋषिकेश में शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए ।जबकि विकासनगर में भी रामपुर तिराहा कांड की 24 वीं बरसी पर उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के सदस्यों ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सपनों के राज्य को बनाये जाने की प्रतिज्ञा की। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को मुजफ्फरनगर कांड (रामपुर तिराहा)  की बरसी के अवसर पर कचहरी परिसर देहरादून स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर शहीद राज्य आंदोलकारियों की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित की। इस अवसर पर विधायक श्री खजान दास भी उपस्थित थे। 

इस दौरान आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा उन्होंने आन्दोलनकारियों पर एक शब्द भी नहीं कहा अब से 9 नवम्बर को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। आंदोलनकारी संगठन की अध्यक्ष वीरा भंडारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों में माइक देने के बावजूद राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों को श्रद्धांजलि के रूप में दो शब्द भी नहीं बोले। राज आंदोलनकारियों ने 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान अपनी मांगे रखने की बात कही।

वहीं रामपुर तिराहा कांड की बरसी पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। हरिद्वार रोड स्थित शहीद स्मारक भवन में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राज्य प्राप्ति के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले आंदोलनकारियों की कुर्बानी से यह राज्य मिला है। शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनना अभी शेष है। गैरसैंण में राजधानी बना कर इस सपने को साकार किया जा सकता है। इस अवसर पर उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा ,डीएस गुसाईं, विक्रम सिंह भंडारी, इंद्र कुमार गोदवानी बीना बहुगुणा मौजूद रहे।

मुजफ्फरनगर कांड के 24 साल बाद भी उत्तराखंड के लोगों को न्याय नहीं मिल पाया है। दो अक्टूबर, 1994 का दिन इतिहास के पन्नों में काला अध्याय बनकर तो दर्ज हो गया, मगर इसका शिकार बने आंदोलनकारियों को न्याय आज तक नसीब नहीं हो पाया। वह दिन कैसे भुलाया जा सकता है, जब उत्तराखंड की मांग को लेकर आंदोलनकारी दिल्ली कूच को जा रहे थे और मुजफ्फरनगर में उन्हें पुलिस की बर्बरता का शिकार होना पड़ा था। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती बताते हैं कि इस कांड में 28 आंदोलनकारी शहीद हो गए थे, जबकि सात महिलाओं की अस्मत लूट ली गई थी। वहीं 17 महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के मामले सामने आए थे।

इतना सब होने के बाद भी कांड के दोषियों को सजा नहीं दी गई। आंदोलनकारियों की शहादत पर उत्तराखंड राज्य बना और तब से अब तक कई मुख्यमंत्री हमें मिल चुके हैं। फिर भी बड़े अफसोस की बात है कि चुनाव के समय आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने का दंभ भरने वाले हमारे नेता खोखले वादों से आगे नहीं बढ़ पाते। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए ठोस पहल नहीं की तो मंच सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।





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