शुक्रवार 19 अक्टूबर 2018 पूरे भारत में दशहरा 2018  को मनाया जा रहा है। दशहरा आश्विन मास शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है. इस दिन परंपरा अनुसार रावण के पुतले को जलाकर असत्य पर सत्य की विजय का पर्व मनाया जाता है.

देश में दशहरा के दिन आमतौर पर रावण दहन किया जाता है. दशहरा पर रावण दहन देश के सभी भागों में किया जाता है. लेकिन हमारे देश ही में कुछ ऐसे भाग हैं जहां रावण का दहन नहीं बल्कि उसकी पूजा की जाती है. तो जानिए रावण के इन 5 मंदिरों के बारे में

मंदसौर-: मध्यप्रदेश के मंदसौर के लोग हर साल रावण की पूजा करते है. मंदसौर रावण की ससुराल है वहां के लोग दामाद के सम्मान की परंपरा को लेकर रावण की पूजा करते है. मंदसौर के रूंडी में रावण की मूर्ति बनी हुई है और लोग उसकी पूजा करते है.

कर्नाटक-: कर्नाटक के कोलार जिले में लोग रावण की पूजा करते हैं. इस लंकेश्वर महोत्सव के मौके पर भव्य जुलूस भी निकला जाता है. रावण की पूजा कोलार जिले के लोग इसलिए करते है कि रावण शिव का परम भक्त था.

अमरावती-: महाराष्ट्र के अमरावती में भी रावण का दहन नहीं किया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है. अमरावती के गढ़चिरौली नामक स्थान पर आदिवासी समुदाय लोग रावण की पूजा करते है.

राजस्थान-: जोधपुर जिले के मन्दोदरी नाम के क्षेत्र में रावण का पूजन किया जाता है. इस स्थान को रावण और मन्दोदरी का विवाह स्थल माना जाता है. जोधपुर में रावण और मन्दोदरी के विवाह स्थल पर आज भी रावण की चवरी नामक एक छतरी है.

हिमाचल प्रदेश-: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शिवनगरी के नाम से मशहूर बैजनाथ कस्बे में लोग रावण का दहन करने की वजाह उसकी पूजा करते है, वे लोग रावण को जलाना महापाप मानते हैं. यहां रावण की पूरी श्रद्धा के साथ पूजन किया जाता है. वहां के लोगों को मानना है कि यहां पर रावण ने शिव की तपस्या कर मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था.

 

फोटो साभार -हरिभूमि





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