देहरादून(दीपिका रावत) : दिवाली का मौका था माता-पिता पुराने घर को सजा रहे थे…और त्यौहार की खुशी दुगुनी तब हुई जब फौजी बेटे ने फोन कर कहा कि मां मैं दिवाली में घर आ रहा हूं. माता-पिता ने पुराने घर की दिवारों को सजाया…उसमें रंगों से ब्रश से कलाकारी की. लेकिन क्या पता था कि इसी आंगन के आगे उनकी किलकारी गूंजेगे वो भी बेटे की शहादत की खबर से.

23 साल की उम्र में शहीद

जी हां ये घर जो आप वीडियो में देख रहे हैं शहीद राजेंद्र का है. जो पिथौरागढ़ के एक छोटे से गांव के रहने वाले थे. उम्र ऐसी थी कि इस उम्र में जो लड़के माता-पिता से बाइक समेत नए नए कपड़ों की डिमांड करते हैं और न मिलने पर गुस्सा हो जाते हैं ऐसी ही उम्र (23 साल) की उम्र में राजेंद्र सीमा पर तैनात हो कर भारी भरकम रायफल उठाकर देश की और देश की जनता की सेवा कर रहे थे. तभी अचानक उपद्रवियों ने उन पर पत्थर से हमला किया जो की उनके सर पर आकर लगा. सुरेंद्र गंभीर रुप ये घायल हो गए. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया.

राजेंद्र था तीन बहनों का इकलौता छोटा भाई, माता-पिता को भेजते थे घर बनाने के लिए पैसें

आपको बता दें राजेंद्र तीन बहनों का इकलौता छोटा भाई था. कई साला से राजेंद्र का परिवार पुराने मकान में रह रहा था और बेटा हर महीने माता-पिता को पैसे भेजता था ताकि नया मकान बन सके. राजेंद्र घर में कमाने वाले अकेले थे. और सबके चहते थे. राजेंद्र ने साइंस से 12वीं की थी वो पढ़ने में काफी होनहार थे लेकिन उन्हे सेना में भर्ती होना था. और चाह थी की अपने मां-बाप को नया घर बनाकर दे सकें लेकिन शायद बेटे का घर बनने का सपना मां-बाप पूरा कर दें लेकिन उस घर को देखने वाला बेटा अब इस दुनिया में नहीं है.

सेना प्रमुख का खुलासा

वहीं इस पर सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भी पाकिस्तान को चेतावनी दी. बिपिन रावत ने जानकारी देते हुए खुलासा किया कि जिन लोगों ने सुरेंद्र पर हमला किया  वो उनके लिए सड़क निर्माण करा रहा था. दरअसल सुरेंद्र की ड्यूटी सड़क निर्माण के दौरान लगी थी ताकि काम आसीनी से बिना किसी रुकावट के हो सके.





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