ऋषिकेश- संत गोपालदास एम्स से डिस्चार्ज होकर बुधवार को मातृ सदन पहुंचे और संथारा का ऐलान किया. जिसके बाद एक बार फिर से पुलिस प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया. लेकिन वहीं बेड उपलब्ध न होने के कारण ऋषिकेश से चंडीगढ़ रेफर किया. रातभर वह इमरजेंसी स्ट्रेचर पर भी रहे.

आपको बता दें बुधवार शाम जब पुलिस प्रशासन उन्हे उठाने के लिए मातृ सदन पहुंचे तो उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था. तहसीलदार ने संत गोपालदास से बाहर आकर मेडिकल जांच कराने के लिए कहा लेकिन संत गोपालदास अडिग रहे.

खून से लिखा पीएम और राष्ट्रपति को पत्र, भारत को बताया आसुरक्षित

वहीं संत गोपालदास ने अपनी अंगुली काटकर पीएम मोदी, राष्ट्रपति और यूएनओ को खून से पत्र लिखा. कहा कि उन्हें अलोकतांत्रिक खौफ से आजादी चाहिए। भारत देश रहने के लिए सुरक्षित नहीं है। उन्हें किसी शरणार्थी देश में भेजा जाए या इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए। कुछ देर बाद सिटी मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह और सीओ कनखल स्वप्न किशोर सिंह मातृ सदन पहुंचे। उन्होंने संत गोपालदास को दरवाजा न खोलने की स्थिति में दरवाजा तोड़ने की चेतावनी। जिसके बाद गोपालदास ने खुद ही दरवाजा खोलकर भागने की कोशिश की. कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने संत को पकड़कर एम्स ले गए जहां बेड न मिलने कारण उन्हे चंडीगढ़ रेफर किया.

जाने-माने अस्पताल का ये हाल तो

वहीं जहां गंगा को लेकर लड़ रहे गोपाल दास अपने फैसले पर अडिग हैं तो वहीं एक बार फिर स्वास्थय सेवाओं पर उंगली उठना लाजमी है. इतने बड़े औऱ जाने माने अस्पताल में बेड़ न होने की बात ये सोचने पर मजबूर कर रही है कि जब इतने जाने-माने अस्पताल का ये हाल तो सोचो सामान्य और छोटे अस्पतालों का और मरीज का क्या हाल होगा.





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