आश्विन माह में आने वाले नवरात्र को शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है. इस समय वातावरण में आलौकिक शक्ति विद्यमान होती है. अगर नवरात्र में मां आदिशक्ति की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की जाए तो हर मनोकामना पूर्ण होती है और कष्टों का निवारण होता है. नवरात्र में मां भगवती के नौ रूपों की पूजा नौ दिनों तक की जाती है.

नवरात्र का समापन दशमी तिथि को विजय दशमी के रूप में होता है. आदिशक्ति के नौ रूपों की अगर नौ दिनों तक विधिवत आराधना की जाए तो मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऋषि मार्कंडेय ने श्री दुर्गा सप्तशती में एक मंत्र के द्वारा बताया है कि नवरात्र में किस तिथि को मां के कौन से रूप की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी.
तृतीयं चंद्रघंटेति कूष्मांडेति चतुर्थकम्..
पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति च.
सप्तमं कालरात्रिति महागौरीति चाष्टमम्..
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:.
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना..

पूजन में नक्षत्रों का महत्व
ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खंड के अनुसार भगवान नारायण ने नारद जी से देवी पूजन के लिए कुछ नक्षत्रों की महत्ता का वर्णन किया. नारायण कहते हैं, आर्द्रा नक्षत्र में देवी को जगाएं और मूल नक्षत्र में आवाहन करें. देवी की पूजा का विसर्जन उत्तराषाढ़ नक्षत्र में करें.

नवमी तिथि जिस दिन आर्द्रा नक्षत्र हो, इस दिन देवी को जाग्रत करके जो मनुष्य पूजा करता है, उसे सौ सालों तक पूजा का फल मिलता है. उत्तराषाढ़ नक्षत्र में देवी की पूजा से वाजपेय यज्ञ फल की प्राप्ति होती है. देवी अथर्वशीर्ष के अनुसार अश्विनी नक्षत्र युक्त मंगलवार को देवी की पूजा से मृत्यु तुल्य कष्ट भी दूर हो जाते हैं.

षोडशोपचार
जब किसी पूजा या अनुष्ठान में देवी-देवताओं को कुछ समर्पित किया जाता है तो वह उनका उपचार कहलाते हैं. षोडश का अर्थ सोलह-16 है. यह इस प्रकार है : आसन, वस्त्र, पाधय, पवित्र नदियों का जल, अर्घ्य, गंध, चंदन, धूप-दीप, पुष्प, विष्णु तैल, श्रंगार-आभूषण, नैवेद्य-भोग, तांबूल, जल, शहद और शयन. देवी उपासना में इनको समर्पित करने का प्रावधान है. इससे मां प्रसन्न होती हैं.

राहू महादशा से मुक्ति
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जो मनुष्य राहू ग्रह की महादशा से अगर पीड़ित अनुभव कर रहा है तो वह नवरात्र के दिनों में हर दिन आने वाले राहू काल में अगर दुर्गा जी के किसी भी मंत्र का जप करे तो निश्चित ही वह राहू ग्रह के दोषों से मुक्त हो जाता है.





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