• राज्यपाल रामनाईक ने भी जताई सहमति 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

लखनऊ : प्राचीन समय से इलाहाबाद को प्रयाग राज कहा जाता था कालांतर में यह इलाहाबाद हो गया लेकिन अब एक बार फिर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने का रास्ता योगी सरकार ने साफ करने की कवायद शुरू कर दी है। कुंभ मेला मार्गदर्शक मंडल की बैठक में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कई कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी में पारित इस प्रस्ताव पर राज्यपाल रामनाईक ने भी सहमति जताई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही इसकी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। राज्यपाल की अध्यक्षता में सर्किट हाउस में हुई मार्गदर्शक मंडल की पहली बैठक में संतों की ओर से इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सदस्यों ने मंजूरी दे दी। 

कुंभ मेला मार्गदर्शक मंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी ने पत्रकारों को बताया, चूंकि दो नदियों के संगम स्थल को प्रयाग के नाम से जाना जाता है, इसलिए हिमालय से निकलीं दो प्रमुख नदियों गंगा एवं यमुना के संगम स्थल को प्रयागराज ही कहा जाना चाहिए। राज्यपाल ने भी विभिन्न उदाहरण के माध्यम से प्रयागराज के नाम पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने बताया कि मेला प्राधिकरण का नाम पहले ही प्रयागराज के नाम पर हो चुका है। बहुत जल्द इलाहाबाद जिले का नाम प्रयागराज होगा। बैठक में कुंभ के मद्देनजर हो रहे स्थायी और अस्थायी निर्माण कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। 

वहीं अफसरों ने इसका प्रस्तुतीकरण किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि  इस भव्य और दिव्य कुंभ को पूरी दुनिया देखेगी। इसके लिए 2446 करोड़ रुपये की 643 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। हर कार्य के पूरा होने की अवधि भी तय कर दी गई है। बैठक में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी, मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले, मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, डॉ.रीता बहुगुणा जोशी, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, ब्रजेश पाठक आदि मौजूद रहे।

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