देहरादून: देहरादून के हर्रावाला स्थित उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय अपने कारनामों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहता है…जी हां एक बार फिर  विश्वविद्यालय में अपने चहेतों को सेट करने के लिए खेल खेला गया है,जिसकी वजह से विश्वविद्यालय में सालों से काम कर रहे कर्मिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। धनवंतरी वैधशाला के द्धारा पीपीपी मोड़ पर सालों से काम कर रहे ऐसे 50 कर्मिकों को विश्व विश्वविद्यालय ने घर बैठने के लिए कह दिया है। जो सालों से इस आस में काम कर रहे थे कि जब भी विश्वविद्यालय में स्थाई नियुक्ति आएंगी तो उन्हे प्राथमिकता के साथ विश्व विश्वविद्यालय स्थाई रूप से रखेगा, क्योंकि वह उक्त पदों के सभी मानकों को पूरा करते है।

यही नहीं कर्मिकों का कहना कि सीसीआईएम के द्धारा जब 2016 में आयुर्वेद और चिकित्सालय का निरीक्षण किया था तो सीसीआईएम उनके समस्त शैक्षिक प्रमाण पत्रों का रिकार्ड अपने पास रखा था,जिसे उन्हे उम्मीद जगी थी कि स्थाई पदों पर मानकों को पूरा करने पर उनहे स्थाई नियुक्ति दी जाएगी। लेकिन 29 मई 2018 को विश्वविद्यालय ने उनहे बिना कारण बताओ विश्वविद्यालय से बहार करने के साथ ही परिसर में रोक लगाने के निर्देश दे दिए।





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