देहरादून : अब यूपी और उत्तराखंड की रोडवेज की बसें अब एक-दूसरे के राज्य में लाख किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में आ-जा सकेंगी। सोमवार को दोनों राज्यों के परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सामने समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

बस चलाने के लिए नहीं पड़ेगी किसी परमिट की जरूरत 

इस समझौते में प्रदेश से उत्तराखंड के बीच डेढ़ दर्जन मार्गों पर रोडवेज बस संचालन की तैयारी है। मौजूदा समय में उत्तराखंड जा रहीं और वहां से यूपी आ रहीं बसों का संचालन अस्थाई परमिट के आधार पर हो रहा है। परमिट की अवधि खत्म हो जाने के बाद दोनों राज्य एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश करने वाली बसों को रोक देते थे। इसके चलते बस यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सोमवार को होने वाले समझौते के बाद दोनों राज्यों को अपनी बस चलाने के लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं पड़ेगी।

216 मार्गों पर यूपी-उत्तराखंड परिवहन की बसें चलेंगी

करार के बाद 216 मार्गों पर यूपी परिवहन निगम की बसें उत्तराखंड में एक लाख 39 हजार किलोमीटर तो उत्तराखंड की बसें यूपी में 335 मार्गों पर दो लाख 52 हजार किलोमीटर हर रोज चलेंगी। इन मार्गों पर यूपी रोडवेज की साधारण बसों से लेकर वोल्वो, स्कैनिया व जनरथ जैसी वातानुकूलित बसें भी चलेंगी।

यूपी उत्तराखंड के बीच एसी स्लीपर बसें भी दौड़ेंगीं

वहीं जल्द ही यूपी उत्तराखंड के बीच एसी स्लीपर बसें भी दौड़ेंगीं। ये बसें प्रमुख रूप से प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, अलीगढ़, मुरादाबाद, आगरा, मथुरा, बहराइच व बरेली से चलेंगी। इसके अलावा दिल्ली-ऋषिकेश-देहरादून, कोटद्वार, हल्द्वानी, हरिद्वार व अल्मोड़ा के मार्ग शामिल हैं।





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