• हिंदू अस्मिता का सवाल है अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण
  • राजनीति के लिए हम सिर्फ अच्छे ही लोगों को चुनें
  • धर्म बदलकर लोग ईसाई नहीं देशद्रोही बनते हैं

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

हरिद्वार : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भले ही सौ फीसद हिंदू निर्माण के पक्ष में न हों, लेकिन, मंदिर निर्माण हर हाल में होगा। क्योंकि राम मंदिर निर्माण हिन्दुओं की अस्मिता से जुड़ा हैऔर श्रीराम करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण जनमानस की भावना है और मंदिर यथास्थान पर ही बनना चाहिए। साथ ही उन्होंने  कहा कि उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में धर्म को लेकर कई तरह के निर्णय आते हैं। उनका मान-सम्मान होना चाहिए, लेकिन धर्म को समाज चलाता है। साधु-संतों का कर्तव्य है कि वे धर्म की रक्षा करें, इसे आगे बढ़ाएं।

भागवत पतंजलि योगपीठ में आयोजित ‘साधु स्वाध्याय संगम’ के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। पांच दिवसीय इस कार्यक्रम का आयोजन आरएसएस के आनुषांगिक संगठन धर्म जागरण विभाग ने किया था। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि वर्ष 2025 में संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर दुनिया भर में सनातन धर्म की विजय पताका फहरायी जाएगी। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य में बाधाएं तो आती ही हैं, लेकिन इनसे निराश नहीं होना चाहिए। श्री भागवत ने कहा कि किसी भी कार्य को करने के लिए सरकार और संगठन की सीमाएं होती हैं, लेकिन साधु-संत इन सीमाओं से परे होते हैं, उनके लिए सारा संसार होता है। इसलिए धर्म, राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए कार्य करें।

बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते मोहन भागवत ने कहा कि 300 वर्षों से ईसाई मिशनरियां गुपचुप तरीके से हमारे देश में काम कर रही हैं, लेकिन धर्म बदलकर लोग ईसाई नहीं देशद्रोही बनते हैं। लोगों को इस बात को समझना चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए मोदी सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आदमी तो बहुत सज्जन है।

उन्होंने कहा आज देखते हैं कि जिनसे हमें बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं, उन्होंने किया बहुत कम है, लेकिन बहुत कुछ करने के लिए समय लगता है। लिहाजा धैर्य रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहला कार्य अच्छा करना नहीं बल्कि अच्छा कार्य करने के लिए माहौल बनाना होता है और इसके लिए कुर्सी पर माहौल बन जाने तक बने रहना जरूरी है। संघ प्रमुख ने कहा कि जब कुर्सी पर बैठे लोगों को यह डर सताने लगता है कि मैं ऐसा कार्य नहीं करूंगा तो कुर्सी बनी रहेगी या चली जाएगी, तब व्यक्ति गलत कार्य करता है।

इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत के पतंजलि योगपीठ पहुंचने पर योगगुरु बाबा रामदेव ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि संघ परिवार की सेवा, साधना और राष्ट्रधर्म परंपरा है। संघ परिवार ने राष्ट्र और समाज के उत्थान को शिक्षा, चरित्र निर्माण व व्यक्ति निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है। कहा कि पतंजलि हमारी गुरु और ऋषि परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

कार्यक्रम में देश भर से आए करीब पांच हजार साधु संतों के साथ ही पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. महावीर प्रसाद अग्रवाल, आचार्यकुलम के निदेशक एलआर सैनी, पतंजलि योग समिति के मुख्य केंद्रीय प्रभारी डॉ. जयदीप आर्य भी मौजूद थे।

वर्तमान राजनीति पर टिप्पणी करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा राजनीति में न तो सौ प्रतिशत अच्छे लोग होते हैं और न ही सौ प्रतिशत बुरे। यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनमें से सिर्फ अच्छे ही लोगों को चुनें।उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कहता कि किसी एक विचाराधारा से संबंधित किसी विशेष को चुनिए, लेकिन इतना अवश्य कहता हूं कि जो सबसे योग्य और अच्छा हो उसे ही चुनें। आपके चुने व्यक्ति पर ही राष्ट्र के विकास और उन्नति का भार होता है।





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