• ग्रामीण आंचलों में बसे गाँव की स्थिति बदलने की क्रांतिकारी आवश्यकता
  • स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करना होगा पर्यटन का प्रशिक्षण देकर
  • साहसिक खेलों को  जोड़ा जा सकता है ग्रामीण पर्यटन से

विपिन कैंथोला 

देहरादून : उत्तराखंड राज्य अपने बाल्यकाल से निकलकर युवा अवस्था की ओर अपने पैर पसार रहा है, लेकिन आज राज्य की आर्थिकी की ओर ध्यान से  देखें तो चारों और यही शोर सुनाई देता है कि प्रदेश में अभी आर्थिक संशोधन की महत्वपूर्ण  आवश्यकता है । जब कोई पुत्र बाल्यकाल से युवा अवस्था की दहलीज पर कदम रखता है तो अपने भविष्य के प्रति  सोचने को विवश  होता है और साथ ही चिंतित भी होता है कि अब उसका आने वाला समय व जीवन कैसा होगा। उत्तराखंड राज्य भी आज उसी अवस्था में आ खड़ा हुआ है,ऐसा नहीं कि इन 18 बरसों में राज्य में विकास न हुआ हो आज देश के कई बड़े ओहदों पर हमारे राज्य के नागरिक अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए हैं, लेकिन राज्य में जारी पलायन ओर रोजगार की भारी कमी से उत्तराखंड का युवा गांव छोड़ बड़े शहरों की ओर भागने को विवश है ऐसे में उत्तराखंड को अगर इस विकट समस्या से निजात मिल सकती है तो वो है केवल उत्तराखंड में पर्यटन व तीर्थटन को विकसित करना।

उत्तराखंड सांस्कृतिक व प्राकृतिक उपलब्धियों से भरा हुआ है  उत्तराखंड  राज्य का अगर परिवेश देखा जाय तो अधिकांश परिवेश ग्रामीण है, लगभग 85% राज्य का भू -भाग हरी भरी वादियों से व ऊँचे ऊंचे हिमशिखरों की घाटियों से उतरती कल कल करती सर्पीली नदियां, प्राकृतिक दृश्यों , बुग्याल पयार , प्राकृतिक जल स्रोतों, व मखमली घास के मैदानों फूलों की घाटियों, सुरम्य सरोवरों, व हिमशिखरों से दिखने वाले झरनों, कहीं सघन जंगलों व जंगली जानवरों व शांत हिमशिखरों व घाटियों में तपस्या में लीन ऋषि, मुनियों की तपास्थली, व इन हिम शिखरों में चमत्कृत कर देने वाली जड़ी बूटियों व विभिन्न धार्मिक धामों, सिद्धपीठों, व पतित पावनी माँ गंगा के उदगम  की से परिपूर्ण  इस प्रकार जिस धरा को कुदरत ने प्राकृतिक सौंदर्य व धार्मिक सौन्दर्य की नेमत  बक्शी हो  वह क्षेत्र भला किसे अपनी ओर आकर्षित न करेगा।

भौगिलिक विविधताओं से भरपूर पहाड़ के गांवों को अगर नए तरीके से विकसित करना है तो यहाँ के गांवों को पर्यटन उद्योग से जोड़ना होगा,अगर विश्व के उद्योगों की ओर नजर दौड़ाई जाए तो विश्व मे  तेल के बाद पर्यटन सबसे बड़ा उद्योग है, आज उत्तराखंड अलग राज्य के रूप में मौजूद हैं आज वैज्ञानिक विकास व पर्यावरण के संरक्षण के लिए बनाए कानूनों का भी सम्मान होना चाहिए । विकास के आड़े आ रहे वन अधिनियम पर भी हमे शिथिलता की ऒर ध्यान देना आवश्यक है। यह भी न हो कि आधुनिकता के नाम पर जंगलो को समाप्त कर दिया जाय । यहाँ  जंगल भी रहे जंगली जानवर भी लेकिन मानव व जानवरों के मध्य सन्तुलन बनाते हुए उत्तराखंड के ग्रामीण पर्यटन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाना होगा । आज राज्य के गांवों को देखा जाय तो अपवाद छोड़कर अधिकांश गांव पलायन रोग से ग्रसित  व उजड़े गांव में तब्दील हो गए हैं , यही यथार्थ है।

आज राज्य के ग्रामीण आंचलों में बसे अधिकांश गाँव की वस्तुस्थिति को बदलने की क्रांतिकारी आवश्यकता है। यहाँ ग्रामीण पर्यटन व तीर्थटन के बहाने एक ऐसा रोजगार युवाओं के लिए  सृजित हो सकता है । जिससे स्थानीय युवाओं को अपने गांव में रोजगार प्राप्त हो सकता है व साथ ही पलायन की मजबूरी से भी दो चार न होना पड़े जब रोजगार अपने गांव में होगा तो अन्य मूलभूत सुविधाएं भी अपने आप मुहैया हो सकती है। राज्य के गांवों से पलायन का एक सबसे बड़ी समस्या रोजगार भी है। ग्रामीण स्थलों में पर्यटन की असीम संम्भावनाएँ रहती है इसके लिए राज्य में नई तकनीकें सहयोगी हो सकती है जैसे कि लोक परम्पराओं का विकास, प्रचार प्रसार, स्थानीय उपलब्ध चीजों व कच्ची सामग्री स्थानीय उत्पादों की अच्छी मार्केटिंग करके घरेलू पर्यटन को आगे बढ़ाया जा सकता है । इसके लिए आज इंटरनेट सेवाओं, अखबार, ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा दी जा सकती है ।

सबसे पहले ग्रामीण पर्यटन को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को स्थानीय युवाओं को पर्यटन की शिक्षा से प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित करना अपनी प्राथमिकता में रखना होगा । प्रशिक्षण के लिये ग्रामीण इलाकों में कार्यशाला आयोजित करवानी होगी, जिसमे अपने पुराने खाद्य सामाग्री को भी नए कलेवर में प्रस्तुत किया जा सके। सरकार को वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली परियोजना की ऋण लेने की क्षमता को भी बढ़ाना होगा ओर अन्य सब्सिडी वाले ऋण की नई योजना भी बनानी होगी साथ ही सरकार को ग्रामीण पर्यटन को बढ़ाने के लिए अच्छी पक्की सड़कें, अच्छे सुसज्जित वाहन, व अच्छे पर्यटन सर्किट का विकास करना होगा, जिससे कि सभी गांवों को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा सके , साथ ही राज्य के पौराणिक धामों, व सिद्धपीठों को भी नए रूप से विकसित करना होगा।

राज्य में प्राकृतिक आपदाएं भी समय समय पर आती रहती है ऐसे में ग्रामीण युवाओं को आपदा प्रबंधन का भी प्रशिक्षण इन युवाओं को दिया जाना महत्वपूर्ण हो जाता हैं जिससे की यहाँ आने वाले पर्यटकों को यह भरोसा हो कि किसी भी परिस्थिति में वो उत्तराखंड में सुरक्षित है, राज्य में ग्रामीण इलाकों में सेवा केंद्र , ट्रेकिंग, रॉक कांबिग, बड़ी नदियों से जुड़े इलाकों में रिवर राप्टिंग, बर्फ़ीले इलाकों में स्नो स्किनिग आदि साहसिक खेलों को भी ग्रामीण पर्यटन से जोड़ा जा सकता है, यह सभी बातें यह दर्शाती है कि अगर इन सभी विन्दुओं की ओर ध्यान दिया जाए तो उत्तराखंड देश का ही नहीं  बल्कि विश्व के पर्यटक स्थलों में से एक हो सकता है।

अभी कुछ नही बिगड़ा हम राज्य के युवाओं को आधुनिक संशाधन से प्रशिक्षित कर उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन को नए मुकाम तक पहुंचा सकते हैं, जिससे कि ग्रामीण पर्यटन राज्य के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है साथ यह उत्तराखंड को आर्थिक मजूबती की ओर अग्रसर कर सकता है ऐसा नहीं कि वर्तमान सरकार इस ओर ध्यान नही दे रही हो लेकिन जब तक स्थानीय युवाओं को इस महत्वपूर्ण मुहिम में सहभागी नहीं बनाया जाएगा तब तक इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता का सही से धरातल पर उतर पाना कठिन सा लगता है। अगर   दृढ़ इच्छा शक्ति से इस योजना को धरातल में उतारा जाय तो यह उत्तराखंड में सबसे ज्यादा सफलता के आयाम स्थापित करेगी और नए उत्तराखंड की रीढ़ की हड्डी साबित होगी ।





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