गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए पिछले तकरीबन चार महीने से अनशन कर रहे स्वामी सानंद का निधन हो गया है। स्वामी सानंद का निधन गुरुवार को एम्स ऋषिकेश में हुआ। हरिद्वार के स्थानीय प्रशासन ने स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद को बुधवार को जबरन उनके अनशन से उठा कर एम्स में एडमिट कराया था। जहां उनकी अगले ही दिन मौत हो गई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को स्वामी सानंद अपना शरीर दान कर गए हैं।

एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने इस बात की पुष्टि की है। डाॅक्टरों के मुताबिक कमजोरी और हार्ट अटैक से स्वामी सानंद का निधन हुआ है।  स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशनरत थे। मंगलवार को उन्होंने जल भी त्याग दिया था।

स्वामी सानंद के निधन के आहत और गुस्साए मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया है कि सानंद की हत्या हुई है।

बता दें कि सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से वार्ता विफल होने के बाद मंगलवार को उन्होंने जल भी त्याग दिया था। बुधवार को पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12:30 बजे पुलिस बल मातृसदन पहुंचा था।

इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट और कनखल सीओ मातृसदन पहुंचे और आश्रम में धारा 144 लगाए जाने की बात कही। इस पर स्वामी शिवानंद भड़क गए और आश्रम में धारा 144 लगाना नियमों के विरुद्ध बताया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने स्वामी शिवानंद से सानंद को ले जाने की अनुमति मांगी। सिटी मजिस्ट्रेट के आग्रह को स्वामी शिवानंद मान गए। मगर स्वामी सानंद ने जाने से इनकार कर दिया था। इसपर सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस बल ने जबरन स्वामी सानंद को उठाकर एंबुलेंस में बैठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया था।

आपको बता दें कि स्वामी सानंद खुद एक प्रोफेसर थे। उनका असली नाम प्रो. जीडी अग्रवाल था। सन्यास ग्रहण करने के बाद उनका नाम स्वामी ज्ञान स्वरूप आनंद पड़ गया था।





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