देहरादून : मसूरी का नाम सुनकर सबसे पहले जहन में हरे-भरे बड़े-बड़े पहाड़, स्नो फॉल सहित कैम्पटी फॉल और मॉल रोड़ की याद जरुर आती है. सीजन के समय देश-विदेश से लोग यहां परिवार के साथ घूमने आते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मसूरी अंग्रेजों के शासनकाल में आम आदमी को मसूरी पहुंचने लिए पैसे देने पड़ते थे और क्या आप ये जानते हैं कि उस दौरान हिंदुस्तानियों का मसूरी जाना बैन था. जी हां आपको सुनकर थोड़ी हैरानी जरुर होगी लेकि ये बिल्कुल सच है.

1929 में मसूरी जाने के लिए एक छोटा सा रास्ता हुआ करता था

आपको बता दें सन् 1929 में मसूरी जाने के लिए एक छोटा सा रास्ता हुआ करता था. जिसमें आने-जाने वालों से टैक्स लिया जाता था. जिसमें ज्यादातर अंग्रेज ही मसूरी जाया-आया करते थे. आप मसूरी जाकर देखेंगे तो आज भी ओल्ड मसूरी रोड पर अंग्रेजी हुकूमत के दौरान लिए जाने वाले टैक्स के दो बोर्ड लगे हुए हैं.

हिन्दुस्तानियों के मसूरी जाने पर पाबंदी थी

आज मसूरी जाने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है लेकिन अंग्रेस के समय मसूरी जाना कोई आसान बात नहीं थी…उस दौरान सिर्फ एक छोटा सा रास्ता हुआ करता था. जिससे वह लोग डांडी यानी पालकी की तरह जिसको चार लोग उठाकर चलते हैं, उसी में सवार होकर मसूरी जाते थे.आपको बता दें उस दौरान अंग्रेज लोग मसूरी में आराम फरमाने जाते थे और वहां हिन्दुस्तानियों के जाने पर पाबंदी थी. लेकिन कुछ समय बाद मसूरी के रखरखाव के लिए टैक्स लिया जाने लगा औऱ हिंदुस्तानियों को वहां जाने देने जाने लगा.

ऐसे जाते थे देहरादून से मसूरी

आपको बता दें देहरादून से मसूरी जाने के लिए राजपुर शहंशाई आश्रम से आगे पहाड़ी रास्ता शुरू होते ही टोल टैक्स का एक नाका है. जहां से डांडी रोड मसूरी को जाता है. उसे आज भी ओल्ड मसूरी रोड के नाम से जाना जाता है. 1929 में ये ही रास्ता मसूरी जाने के लिए प्रयोग में लाया जाता था. जिसे आज मसूरी ट्रैकिंग रूट के नाम से जाना जाता है.

वहीं खास बात आपको बता दें कि ब्रिटिश शासन काल में इस मार्ग से रेल लाइन का प्रोजेक्ट भी तैयार किया गया था लेकिन वह किसी कारणों से नहीं बन पाया. इस ओल्ड मसूरी रोड पर आज भी अग्रेजों के काल में म्युन्सिपल द्वारा लिए जाने वाले टोल टैक्स के प्रमाण मौजूद है.





See More

 
Top