• अचानक चुनाव तैयारियों के आदेश के बाद राज्य सरकार सकते में
  • राज्य निर्वाचन आयोग तैयारियों के होम वर्क में जुटा 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नैनीताल : उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नगर निगम, नगर पालिका में आरक्षण का निर्धारण 15 अक्टूबर तक पूरा करने का आदेश दिया है। वहीँ आरक्षण निर्धारण के एक सप्ताह बाद राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। कोर्ट के आदेश के बाद जहां अचानक चुनाव तैयारियों को लेकर राज्य सरकार सकते में आ गई है, वहीं राज्य निर्वाचन आयोग तैयारियों के होम वर्क में जुट गया है।

गौरतलब हो कि इसी साल 25 मई को हाई कोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार की ओर से निकायों में 11 मई का आरक्षण निर्धारण से संबंधित नोटिफिकेशन निरस्त कर दिया था। एकलपीठ के इस फैसले को राज्य सरकार ने विशेष अपील दायर कर चुनौती दी थी। एकलपीठ ने सरकार को निर्देश दिए थे कि वह आरक्षण व परिसीमन से संंबंधित अधिसूचना एक साथ नए सिरे से जारी करे।

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि रुड़की नगर निगम के आरक्षण को लेकर भ्रम है। शेष नगर निगमों की आरक्षण प्रक्रिया 15 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद निर्वाचन आयोग को निकाय चुनाव की प्रक्रिया सात दिन के भीतर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने महाधिवक्ता की सहमति पर रुड़की नगर निगम के आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है, ताकि इसके बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाए।

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243 आर, 243 यू और उत्तर प्रदेश म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट-1959 का हवाला देते हुए कहा कि निकायों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव हो जाने चाहिए थे। महाधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि राज्य की 39 नगर पालिका व नगर पंचायतों के आरक्षण का निर्धारण पहले ही हो चुका है। श्रीनगर गढ़वाल, बाजपुर पालिका के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। महाधिवक्ता की इन दलीलों के बाद खंडपीठ ने विशेष अपील को निस्तारित कर दिया।

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