रुड़की : सावधान अगर आपको उत्तराखंड में प्रवेश करना है तो सोच समझकर करना पड़ेगा क्योंकि उत्तराखंड के बॉर्डर नारसन से लेकर हरिद्वार तक का सफर आपको सड़कों पर नहीं बल्कि गड्ढों पर चलकर तय करना होगा. इस दौरान कही कोई हादसा हो जाता है तो उसका ज़िम्मेदार कोई नही होगा. बेहाल हुई इन सड़कों को लेकर जनपद हरिद्वार के जनप्रतिनिधि पूरी तरह से आँखे मूंदे हुए हैं. जिसको लेकर अब तक ना जाने कितनी सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. पर सरकार या कोई जनप्रतिनिधि इस बारे में बिल्कुल भी गंभीर नज़र नहीं आ रहे हैं. आलम यह हो चुका है कि नारसन से हरिद्वार तक का रास्ता जहाँ घण्टे में तय होता था वहां अब 5 घण्टे लगने लगे हैं और कइयों की जान जा चुकी हैं. जिसको लेकर अब स्थानीय और बाहर दोनों जगहों के लोग रोष में हैं.

वही बात अगर रुड़की करें तो ये कहना गलत नहीं होगा कि भाई यहां सड़कों में गड्ढें हैं कि गड्ढों में सड़कें. शिक्षा नगरी के नाम से जाने जानें वाले शहर रुड़की की बात जब आती है तो दिमाग में तस्वीर आती है अच्छी शिक्षा, डेवलपमेंट, बाजार से लेकर अच्छी सड़कें लेकिन जो यहां आता है तब इस शहर की पोल खुलती नजर आती है. लेकिन क्या कभी किसी मंत्री-विधायक या प्रतिनिधि की नजर इन सड़कों पर नहीं जाती? और जाती है तो क्या उन्हें जनता की जान की कोई फिक्र नहीं है जो गड्ढें देखकर भी नजरअंदाज कर जाते हैं. शासन या प्रशासन का कोई भी नुमाईंदा इन सड़कों की कोई सुध नही ले रहा है जनप्रतिनिधि भी अपनी आंखें बंद किये बैठे है। 

जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मंत्री-विधायकों को चुनती है ताकि उन्हे  इससे निजात दिला सकें लेकिन ऊपर देखने वालों की नजर कभी नीचे सड़कों में हुए गड्ढों पर जाती ही नहीं है ऐसा नें आम जनता का क्या हो गा ये सोचने वाली बात है.





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