गंगा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा: जलपुरुष राजेंद्र सिंह

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : गंगा रक्षा को 112 दिन की तपस्या (अनशन)और उनके निधन पर धर्मनगरी का संत समाज भी दुखी है। संतों ने उनके निधन को गंगा रक्षा के लिए व्यर्थ नहीं जाने देने की बात कही है। वहीं एम्स ऋषिकेश में स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि स्वामी जी आध्यात्मिक वैज्ञानिक और संकल्पित व्यक्ति थे। गंगा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

आचार्य महामंडलेश्वर श्री पंचदशनाम जूड़ा अखाड़ा स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि स्वामी सानंद ने गंगा रक्षा को अपने प्राणों की आहुति दी है। काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने स्वामी सानंद के निधन पर गहरा शोक जताया। उन्होंने कहा कि मां गंगा हमारी आस्था की प्रतीक है। मां गंगा की निर्मलता के लिए संत समाज सदैव समर्पित रहता है। जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि यह दुख की घड़ी है। सभी संत इससे व्यथित हैं।

महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद ने कहा गंगा की रक्षा को लेकर समय-समय पर आंदोलन चला है। स्वामी सांनद ने अपने जीवन को गंगा रक्षा के लिए त्यागा है। गंगा रक्षा के लिए गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। जयराम आश्रम के पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने भी स्वामी सांनद के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि गंगा रक्षा के लिए संतों के प्राणों के बलिदान पर अब तो गंभीरता दिखनी चाहिए। आने वाले दिनों में गंगा रक्षा के लिए संत बड़ा कदम उठाएंगे।

वहीं एम्स ऋषिकेश में स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने निदेशक एम्स के इस बयान को झूठा करार दिया, जिसमें निदेशक ने कहा था कि स्वामी सानंद अपना अनशन तोड़ना चाहते थे, मगर परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति में ऐसा करने से रोक रहा था। जल पुरुष ने कहा कि स्वामी सानंद से कोई जबरदस्ती नहीं करा सकता। वह अपने मन और आत्मा की आवाज पर काम करते थे और वह गहरी समझ वाले व्यक्ति थे। उनके लिए एम्स निदेशक का इस तरह का बयान उनका अपमान है।

जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि स्वामी सानंद का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। आने वाले चुनाव मैं इसका असर दिखाई देगा। उन्होंने कहा गंगा के साथ धोखा करने वाले लोगों को स्वामी आनंद की आत्मा और गंगा मैया कभी माफ नहीं करेगी ।उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी सानंद की सरकार ने उपेक्षा की है। समय रहते सरकार के लोग उनसे मिलते बातचीत करते मगर ऐसा नहीं हुआ। सरकार डरी हुई है । यही कारण है कि स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन से हमें रोका जा रहा है। जल पुरुष ने कहा इस रविवार से हम यहां से गंगा के लिए आंदोलन शुरू करने वाले हैं।

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के परिजन एम्स ऋषिकेश पहुंचे हैं। परिजनों ने एम्स प्रशासन से उनके अंतिम दर्शन के लिए आग्रह किया है। उनके भतीजे अभिषेक स्वरूप ने कहा कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने गंगा के लिए अपने कुर्बानी दी है। मरणोपरांत उनका शरीर चिकित्सा विज्ञान के काम आएगा, लेकिन उनके अंतिम दर्शन से परिजनों को दूर रखना सही नहीं है। स्वामी सानंद के छोटे भाई निरंजन स्वरूप, भाभी शकुंतला देवी, दत्तक पुत्र तरुण अग्रवाल, भतीजे आलोक गुप्ता, चेतन गर्ग, अश्वनी अग्रवाल, अनिल गर्ग आदि यहां मौजूद है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में अब कोई भी बाहरी व्यक्ति स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन नहीं कर पाएगा। एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि एम्स में वर्तमान में तीन कान्‍फ्रेंस चल रही है। जिसमें देशभर से कई डेलिगेट्स आए हैं। एम्स के अंदरूनी कार्यों पर कोई असर ना पड़े इस बात को ध्यान में रखते हुए एम्स प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।

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